लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और पंजाब में राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज होती जा रही है। इस बार चुनाव दिलचस्प व चुनौतीपूर्ण होने जा रहे हैं। खासकर पुश्तैनी सीटों पर अपनी साख व जीत को बरकरार रखना चुनौती होगी। जिन सीटों पर चेहरे बदल रहे हैं, उन सीटों को जीतना पार्टी के लिए मुश्किल होगा।
पटियाला लोकसभा सीट पर कांग्रेस की परनीत कौर मजबूत उम्मीदवार तो हैं, लेकिन इस बार परनीत कौर भाजपा के चुनाव चिह्न पर उतर रही हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर केंद्र में मंत्री भी रही हैं। इस बार पटियाला में कांग्रेस धर्मवीर गांधी को पार्टी जॉइन करवाकर मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस के लिए यह सीट को बचाना बड़ी चुनौती होगी। वहीं तीन बार लगातार लुधियाना से जीत हासिल करने वाली कांग्रेस को चौथी बार जीतने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना होगा। कांग्रेस से संसदीय चुनाव जीतने वाले रवनीत बिट्टू इस बार भाजपा की टिकट पर लुधियाना से मैदान में हैं।
कांग्रेस किसी नए चेहरे की तलाश में है, जिसके जरिए अपनी इस सीट व जीत को बरकरार रख सके। इसी तरह से जालंधर में आप के लिए बड़ी दिक्कत है। कांग्रेस का किला ध्वस्त करने वाले आप के सांसद रिंकू भाजपा को जॉइन कर चुके हैं। आप के लिए जालंधर की सीट को दोबारा जीतना मुश्किल की राह होगी।
आप के लिए जालंधर की सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। कांग्रेस इस सीट से चरणजीत चन्नी को उतारने की तैयारी कर रही है, जबकि आप की तरफ से किसी दमदार चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी चल रही है।
संगरूर सीट पर लगातार भगवंत मान जीतते रहे हैं लेकिन उपचुनाव में यह सीट अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने जीत ली थी। इस बार आप की तरफ से मंत्री मीत हेयर मैदान में है और आप के लिए अपनी खोई हुई सीट को दोबारा पाना जद्दोजहद हो सकती है।
अकाली दल की बीबी हरसिमरत कौर बठिंडा से पिछली बार 2019 में जीती थी, जिसमें अकाली भाजपा गठबंधन था। उनकी जीत महज 20 हजार वोटों से हुई थी। इस बार अकाली दल व भाजपा के रास्ते अलग-अलग हैं और अकाली दल के लिए यह सीट भी प्रतिष्ठा व चुनौतीपूर्ण होगी। हरसिमरत कौर अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल की पत्नी हैं।