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हरियाणा में भाजपा की 'सुनामी' में कई दिग्गज हारे, ‘लालों’ और हुड्डा के गढ़ हुए ध्वस्त, जानिए कैसे

Fri, 24 May 2019 01:33 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Bhupinder Singh Hooda, Deepender Singh Hooda - फोटो : File Photo
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हरियाणा में भाजपा ने दस का दम दिखाकर विपक्षियों को बेदम कर दिया है। सत्ताधारी दल ने ऐसी अचूक रणनीति बनाई कि ‘लालों’ और हुड्डा के गढ़ 2019 में ध्वस्त कर डाले। पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तीनों ही सीटों को अपने टॉप एजेंडे में रखा था। जीत दर्ज करने केलिए उन्होंने प्रचार में भी पूरी ताकत झोंकी। नतीजा, ये रहा कि तीनों ही सीटों पर ताऊ देवीलाल, भजन लाल और हुड्डा परिवार को हार का सामना करना पड़ा।
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सिरसा में इनेलो भी अपने गढ़ में चित हो गई। ‘लालों’व हुड्डा परिवार के अलावा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा, कैप्टन अजय यादव, कुलदीप शर्मा, अवतार भड़ाना के लिए ये चुनाव नतीजे किसी सदमे से कम नहीं हैं। भिवानी-महेंद्रगढ़ में बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी को लगातार दूसरी हार झेलनी पड़ी है। हिसार में बीते चुनाव में जीते दुष्यंत चौटाला इस बार भाजपा के बृजेंद्र सिंह से बड़े अंतर से हार गए। उन्हें इनेलो और चौटाला परिवार में टूट का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।

बेशक, उन्होंने जजपा के बैनर तले ताल ठोकी, लेकिन नतीजे सुखद नहीं रहे। हिसार सीट पर ही भजनलाल के पोते भव्य बिश्नोई मैदान में थे, उन्हें पहले ही चुनाव में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। दादा भजनलाल व पिता कुलदीप बिश्नोई का नाम भी उनके काम नहीं आया। सिरसा सीट चौटाला परिवार व इनेलो का दुर्ग मानी जाती है, यहां भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की है। इस सीट पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर लगातार दूसरी बार हारे हैं। पूर्व आईआरएस अधिकारी सुनीता दुग्गल ने सांसद चरणजीत रोड़ी व तंवर को हार का स्वाद चखाकर संसद का रास्ता तय किया है।
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हुड्डा परिवार को अपने गढ़ रोहतक में दो दशक बार हार से रूबरू होना पड़ा। यहां भाजपा ने गैर जाट कार्ड को इतना भुनाया कि दीपेंद्र उसकी काट ही नहीं ढूंढ पाए। दो बार कांग्रेस और एक बार आजाद सांसद रहे अरविंद शर्मा ने उन्हें धूल चटा दी।

पन्ना प्रमुख और बूथपालक बने ताकत

भाजपा मोदी के नाम के आसरे तो थी ही, उसने संगठन भी बेहद मजबूत खड़ा किया था। केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की मनोहर सरकार की नीतियों को पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर तक पहुंचाया। उज्जवला योजना, हर घर शौचालय, किसान सम्मान निधि, सौभाग्य व जन-धन योजना के अलावा हरियाणा में ग्रुप डी के साथ ही बड़े पैमाने पर बिना पर्ची और खर्ची के भर्ती का भाजपा को चुनाव में बड़ा लाभ मिला। पन्ना प्रमुखों ने हर बूथ पर एक-एक वोट तक पहुंच बनाई थी तो बूथपालकों ने अपना बूथ, सबसे मजबूत मुहिम को सिरे चढ़ाया।

देवीलाल, हुड्डा परिवार संसद से बाहर
देवीलाल परिवार के लाल दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला जजपा व अर्जुन चौटाला इनेलो से चुनावी दंगल में कूदे थे। तीनों को करारी हार झेलनी पड़ी है। 17वीं लोकसभा में चौटाला परिवार से कोई संसद में नहीं होगा। हुड्डा परिवार के साथ भी यही हुआ है। भूपेंद्र हुड्डा के बाद दीपेंद्र लगातार तीन बार संसद पुहंचे, लेकिन 2019 में चौथी बार संसद से बाहर हो गए। भाजपा ने उनका विजय रथ रोक दिया। 
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इनकी हरसत रह गई अधूरी

चार बार सांसद रही कुमारी सैलजा ने पिछले लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी थी। वह राज्यसभा चली गई थीं। इस बार लोकसभा में वापसी करना चाहती थी, लेकिन मोदी की सुनामी में जीत नहीं पाई। कैप्टन अजय यादव का गुरुग्राम में राव इंद्रजीत को हराने का सपना ही रह गया। फरीदाबाद में अवतार भड़ाना को जनता ने दोबारा नकारा। ललित नागर की टिकट कटवाने का भी नुकसान हुआ।

कुरुक्षेत्र के रण में कांग्रेस के निर्मल धराशायी हो गए। हार ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कुलदीप शर्मा करनाल में बुरी तरह पराजित हुए। उन्हें प्रदेश में सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस इस बार अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद लगाए हुए थी, लेकिन उम्मीदवारों की सांसद बनने की हसरत पूरी नहीं हो पाई। ये दिग्गज अपनी साख बचाने में पूरी तरह से नाकाम रहे और बड़ी हार खाते में दर्ज करा गए।
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