पंजाब में अकाली गठबंधन के साथ भाजपा ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन अमृतसर में सीट गंवा दी। यहां से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की हार का बड़ा कारण सामने आया है। दरअसल, भाजपा अपनी आपसी फूट और गुटबाजी से नहीं उबर सकी। एक बार फिर पार्टी ने अमृतसर सीट गवां दी। अरुण जेटली के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को हरा कर दिल्ली भेजा।
गुरदासपुर और होशियारपुर सीटें भी मोदी मैजिक के सहारे ही बच सकीं। भाजपा में सबसे ज्यादा गुटबाजी अमृतसर में है, जिसने पुरी का काफी नुकसान किया। हालांकि पुरी आखिर तक बाहरी के टैग से भी पीछा नहीं छुड़ा सके। अमृतसर में प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक और पूर्व मंत्री अनिल जोशी के गुटों के बीच जबरदस्त खींचतान है, जो प्रचार के अंतिम समय तक जारी रही।
प्रदेश प्रधान होने के नाते अमृतसर सीट जिताना मलिक की जिम्मेदारी थी। उन्हें सबको साथ लेकर पार्टी को एकजुट करना चाहिए था। लेकिन वह गुटबाजी को बढ़ावा देते रहे, हलके में ज्यादा समय भी नहीं दे सके।