लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले चंडीगढ़ से बीजेपी को मिली बुरी खबर। दरअसल, वरिष्ठ नेता हरमोहन धवन 'झाड़ू' थामने जा रहे हैं। जी हां, धवन आम आदमी पार्टी ज्वॉइन करने जा रहे हैं, इसके लिए 18 नवंबर का दिन तय किया गया है। इस दौरान सांसद भगवंत मान, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के अलावा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी चंडीगढ़ आ सकते हैं।
हरमोहन धवन के 'आप' में शामिल होने से वे चंडीगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। हरमोहन धवन के समर्थक उत्साहित हैं। धवन दिसंबर महीने में रैली कर अपनी ताकत दिखाएंगे। हरमोहन धवन शहर के एक कद्दावर नेता हैं। वे कई पार्टियों में अहम पदों पर रह चुके हैं। बसपा में शामिल होकर वे चुनाव भी लड़ चुके हैं। बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में 'आप' को एक लाख से अधिक वोट मिले थे।
यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। बताया जा रहा है कि 'आप' लोकसभा में हरमोहन धवन को उम्मीदवार बना सकती है।
धवन के आप में जाने से मुकाबला त्रिकोणीय होगा
हरमोहन धवन
- फोटो : amar ujala
लोकसभा चुनाव 2019 में चंडीगढ़ से पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के आम आदमी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद है। वहीं इसके किस दल को फायदा होगा और किसको नुकसान, इसकी भी चर्चा मंगलवार को पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में रही। फिलहाल कुछ भी तय नहीं है कि धवन के मैदान में उतरने से किसको फायदा होगा और किसको नुकसान होगा।
इसका बड़ा कारण यह है कि धवन के साथ कांग्रेस, भाजपा और बसपा के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। धवन खुद भी इन तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों में रह चुके हैं। हालांकि एक बात तय है कि कांग्रेस और भाजपा की गुटबाजी का फायदा धवन को मिल सकता है। इस समय कांग्रेस में टिकट के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और मनीष तिवारी के बीच खींचतान चल रही है जबकि भाजपा में सांसद किरण खेर और भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन टिकट के दावेदार हैं।
ऐसे में दोनो दलों में किसी एक को टिकट मिलने पर दूसरे गुट के भीतरघात का फायदा धवन को मिल सकता है लेकिन हर लोकसभा चुनाव में पाला बदलने का नुकसान भी धवन को झेलना पड़ सकता है। मालूम हो कि भाजपा में अध्यक्ष संजय टंडन ही धवन को लेकर आए थे लेकिन इस समय टंडन के साथ ही धवन का छत्तीस का आंकड़ा है।
अपने आप जाएं तो जाएं भाजपा नहीं निकालेगी धवन को
हरमोहन धवन
पिछले दो साल से धवन खुलकर भाजपा के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं लेकिन भाजपा ने धवन पर कोई कार्रवाई नहीं की। पार्टी ने धवन को कार्यक्रमों में न बुलाकर एक तरह से उनके साथ किनारा कर लिया है। पार्टी के अनुसार पार्टी उन्हें खुद नहीं निकालेगी अगर वह खुद पार्टी छोड़कर जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं। पंजाब और चंडीगढ़ संगठन मंत्री दिनेश कुमार का कहना है कि धवन स्वयं में ही स्वतंत्र हैं। वह इस मामले में टिप्पणी नहीं करना चाहते।
आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता चाहते थे कि मैं सोमवार को दिल्ली में ही पार्टी ज्वाइन कर लूं लेकिन मैंने अपने समर्थकों से बात कर इस बारे में फैसला लेने की बात कही क्योंकि समर्थकों की राय मेरे लिए बहुत अहमियत रखती है। इस समय शहरवासी भाजपा और कांग्रेस दोनों से ही दुखी है। मुझे राजनीति में दो ही चीजें सिखाई गई हैं कि जब विपक्ष में हो तो लोगों की आवाज मजबूती से उठाओ और जब सता में रहो तो कलम की ताकत से लोगों के काम करवाओ। मैं अब तक इन्हीं नीतियों पर काम कर रहा हूं और आगे भी करूंगा।
- हरमोहन धवन, वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री