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हरियाणा में भाजपा ने पुराने चेहरों पर जताया भरोसा, सियासी तीर से साधे कई निशाने, जानिए समीकरण

Sun, 07 Apr 2019 05:21 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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लोकसभा चुनाव 2019
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आखिरकार लंबे मंथन के बाद भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने हरियाणा की दस में से आठ सीटों पर टिकट फाइनल कर न केवल जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का काम किया है, बल्कि इस बार भाजपा ने तीन नए चेहरों पर भी दांव खेला है। साथ ही पांच सीटों पर भाजपा ने अपने पुराने धुरंधरों को ही फिर से चुनावी रण में उतारा है। 

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भाजपा ने टिकटों की यह घोषणा विरोधियों की घेराबंदी की रणनीति के तहत की है। भाजपा हाईकमान चाहता है कि इस बार हरियाणा में दस की दस सीटें जीती जाएं। इसी के चलते केंद्रीय चुनाव समिति ने रोहतक और हिसार की सीट पर प्रत्याशी घोषित करने में जल्दबाजी नहीं की है। भाजपा वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 10 में से 7 सीटें जीती थी।

 भाजपा जो 3 सीटें हारी थी, उन सीटों में रोहतक, हिसार और सिरसा सीट शामिल थी। रोहतक सीट कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा ने जीत थी। यह सीट हुड्डा परिवार का गढ़ मानी जाती है, इसलिए भाजपा हाईकमान इस सीट पर दीपेंद्र को टक्कर देने वाला दमदार चेहरा चाहती है।

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इस सीट पर हरियाणा सरकार में मंत्री ओपी धनखड़, राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर व पूर्व सांसद अरविंद शर्मा का नाम चर्चा में है। मगर हाईकमान को अब क्षेत्र के सियासी समीकरणों को आकलन करते इस सीट के लिए जिताऊ चेहरा तय करना है।

इसी तरह हिसार सीट पिछली बार इनेलो के टिकट पर दुष्यंत चौटाला ने जीती थी। मगर आज समीकरण कुछ अलग है। इनेलो टूट चुकी है और उसी में से जननायक जनता पार्टी (जजपा) का उदय हो चुका है। दुष्यंत चौटाला को भी इनेलो से निकाला जा चुका है और वह अब जजपा में है। इसलिए भाजपा इस सीट को हर हालत में जीतना चाहती है। 

भाजपा की ओर से इस सीट पर हरियाणा सरकार में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु और इनेलो छोड़कर भाजपा में आए रणबीर गंगवा का नाम चर्चा में है। लेकिन फैसला हाईकमान को करना है। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि भाजपा इन दोनों सीटों पर संभावित दावेदारों की बजाए किसी अन्य चर्चित चेहरे को मुकाबले में उतार दे।

अंबाला सीट पर पर भी पुराना चेहरा रतनलाल कटारिया मैदान में है। वह एक बार कुमारी सैलजा से हार चुके है और एक बार उन्हें हरा भी चुके हैं। कांग्रेस की ओर से इस बार भी संभावित उम्मीदवार कुमारी सैलजा ही हो सकती हैं। इस सीट पर पहले पंजाबी गायक हंसराज हंस और रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया का भी नाम था। 
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मगर भाजपा हाईकमान ने भरोसा रतनलाल पर ही जताया। सिरसा सीट पर  इस बार सेवानिवृत्त आईआरएस अफसर सुनीता दुग्गल को मैदान में उतारा है। इस सीट पर भाजपा हारी थी और इनेलो जीती थी। सुनीता दुग्गल वर्ष 2014 से सिरसा की रतिया सीट से विधानसभा चुनाव लड़ी और करीब 453 वोट से हारी थीं। उसके बाद से ही सुनीता इलाके में सक्रिय है। इसी के चलते भाजपा ने अब सुनीता पर भरोसा जताते हुए उन्हे इस बार लोकसभा का टिकट दिया है।

भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मबीर इस बार फिर मैदान में है। उन्होंने पहले चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई थी, वह अपने इलाके में विकास कार्यों को लेकर भी थोड़े नाराज भी चल रहे थे। मगर भाजपा ने अब उन्हें ही चुनावी मुकाबले में आगे किया है। धर्मबीर इस सीट पर पूर्व सीएम बंसीलाल परिवार की तीन पीढ़ियों को परास्त करने के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पूर्व सीएम बंसीलाल, उनके बेटे सुरेंद्र सिंह और उनकी पौत्री श्रुति चौधरी को परास्त किया है। 

करनाल सीट से संजय भाटिया  2004 और 2009 में पानीपत विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन वे हार गए थे। संगठन में अच्छी पकड़ और सीएम की पसंद होने की वजह से संजय भाटिया को अब करनाल से लोकसभा का टिकट मिला है। इस सीट पर उन्हें पंजाबी चेहरे के रूप में उतारा गया है।

सोनीपत से रमेश चंद्र कौशिक, फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर और गुरुग्राम से राव इंद्रजीत भाजपा के मौजूदा सांसद है। भाजपा इन सीटों पर कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहती, इसलिए मौजूदा सियासी परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा ने इन्हीं धुरंधरों पर दांव खेला है।
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