चुनाव आयोग ने शेरगिल का नामांकन इस आधार पर रद्द किया कि उन्होंने वर्ष 2017 में मोहाली से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव खर्च का ब्योरा आयोग को नहीं सौंपा। इस पर आयोग ने 7 जून, 2018 को उन पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। यह रोक 6 जून, 2021 तक प्रभावी रहनी थी।
शेरगिल की दलीलें
- शेरगिल ने हाईकोर्ट में दलील दी कि नामांकन पत्र में उन्होंने अपने आवश्यक खर्च का पूरा ब्योरा दिया था और रिटर्निंग अफसर ने भी इसकी पूरी जांच करने के बाद उस पर सहमति जताई थी। इसी आधार पर शेरगिल ने 29 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल किया था।
- शेरगिल ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने के बारे में चुनाव आयोग या राज्य चुनाव अधिकारी की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और ना ही उन्हें इस मामले में अपना पक्ष रखने का कोई अवसर दिया गया।