पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थायी लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) के पास पासपोर्ट अधिकारी को पासपोर्ट जारी करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की ओर से दो मामलों में पासपोर्ट जारी करने के लिए स्थायी लोक अदालतों द्वारा पारित आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
लुधियाना लोक अदालत द्वारा याचिकाकर्ताओं को आदेश के 7 दिन की अवधि के भीतर पासपोर्ट तैयार करने और भेजने का निर्देश दिया गया था। साथ ही देरी के लिए प्रतिदिन 1000 रुपये का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम में पासपोर्ट, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय या विदेश मंत्रालय से संबंधित किसी भी बात का उल्लेख नहीं है।
उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में न तो कोई अधिसूचना है और न ही किसी न्यायिक फैसले में ऐसा माना गया है। ऐसा कोई कानून या कानूनी आदेश नहीं है जो स्थायी लोक अदालत को पासपोर्ट से संबंधित किसी भी शिकायत पर विचार करने का अधिकार देता हो। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज है। यह देश के नागरिक को जारी किया जाता है, जिसे देश के भीतर यात्रा करने के लिए इमीग्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन किसी अन्य देश में जाने के लिए इसकी आवश्यकता हो सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट जारी करना अनिवार्य सेवा नहीं है और क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी कोई वाणिज्यिक या सेवा उन्मुख गतिविधि नहीं करता है। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को सेवा प्रदाता नहीं कहा जा सकता है और सेवा प्रदाता और प्राप्तकर्ता के बीच किसी भी संबंध की अनुपस्थिति है। स्थायी लोक अदालत (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) ने इस प्रकार अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने और आवेदन को अनुमति देने में गलती की है।