हरियाणा पशुपालन विभाग के निदेशक का जिम्मा संभाल रहे संयुक्त निदेशक प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खुल गया है। विभाग के डॉक्टरों ने ही उनके खिलाफ सीएम मनोहर लाल, पशुपालन मंत्री जेपी दलाल, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव वी. उमाशंकर व अतिरिक्त मुख्य सचिव आरएस बुंदरु को पत्र लिखकर चार्ज वापस लेने की मांग की है। शिकायत पत्र ईमेल से भेजा गया है। तत्कालीन एसीएस पशुपालन सुनील गुलाटी ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर 14 अक्टूबर 2019 को संयुक्त निदेशक डॉ. ओपी छिक्कारा को महानिदेशक की वित्तीय व प्रशासनिक शक्तियां सौंपी थी।
आगामी आदेशों तक यह जिम्मा सौंपा गया था। जिस समय यह जिम्मा दिया गया, उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। तत्कालीन एसीएस ने यह अहम जिम्मा सौंपने के लिए मुख्यमंत्री व सरकार की मंजूरी नहीं ली थी। पशुपालन विभाग में कार्यरत डॉ. सुरेंद्र सिंह दुहन, डॉ. ललित कुमार व डॉ. सुभाष चंद्र ने सीएम व अन्य को भेजी शिकायत में आदेश संख्या के साथ इसका जिक्र किया है। तीनों डॉक्टर भरतीय मजदूर संघ से संबद्ध पशु चिकित्सा परिषद हरियाणा के पदाधिकारी भी हैं। तीनों डॉक्टरों की शिकायत को डॉ. छिक्कारा ने सिरे से नकारते हुए गहरी साजिश बताया है।
सूत्रों के अनुसार सरकार ने शिकायत को गंभीरता से लेते आरोपों की पड़ताल शुरू करा दी है। आरोप सही पाए जाने पर ही आगामी निर्णय लिया जाएगा। सरकार को भेजी गई शिकायत में तीनों डॉक्टरों ने संयुक्त निदेशक को निदेशक पद के लिए अपात्र बताकर शक्तियां वापस लेने की मांग की है। डॉ. सुरेंद्र सिंह दुहन, डॉ. ललित कुमार व डॉ. सुभाष चंद्र ने विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के भी आरोप लगाए हैं।
साथ ही कहा कि पशु चिकित्सा परिषद पदाधिकारियों को डॉ. छिक्कारा इसलिए भी निशाने पर लेने में लगे हैं, चूंकि वह गलघोंटू व मुंहखुर की बीमारी की रोकथाम के लिए निम्न गुणवत्ता की सिंगल वैक्सीन खरीदना चाहते थे, जिसे उन्होंने नहीं खरीदने दिया था। कोरोना से लड़ाई में पीपीई किट व मास्क मांगने पर भी उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार संयुक्त निदेशक से अतिरिक्त कार्यभार वापस लेकर नियमानुसार स्थायी निदेशक नियुक्त करे ताकि बिना मानसिक दबाव के काम कर सकें।