कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर मजदूरी करने वालों पर पड़ा है। काम की तलाश में अन्य प्रदेशों से आकर यहां काम कर रहे लोगों से जब लॉकडाउन में काम छिना तो उन्हें अपने प्रदेश लौटना ही बेहतर विकल्प दिख रहा है। बस और ट्रेन बंद हुईं तो कुछ लोग पैदल ही अपने घर की ओर निकल गए। प्रशासन पर लोगों के पलायन का दबाव बढ़ा तो उनके रहने व खाने की व्यवस्था की, लेकिन अब लोग अपने घर जाना चाहते हैं। शहर में काम की तलाश में सबसे ज्यादा 64.2 प्रतिशत लोग यूपी से जबकि 33 प्रतिशत लोग बिहार से आए हैं।
विज्ञापन
ऐसे में श्रमिक स्पेशल ट्रेन से इन लोगों को उनके प्रदेश तक पहुंचाना एक बड़ा महत्वपूर्ण कार्य है। लॉकडाउन के बाद सबसे समस्या श्रमिक वर्ग के लोगों को ही है। शहर में 2 हजार लोग ऐसे हैं, जिनके पास अपना घर नहीं है। ऐसे में एक ओर घर नहीं है लोगों के पास वहीं उनके पास अब काम भी नहीं है। मार्च की शुरुआत में ही लॉकडाउन की घोषणा के बाद कई मजदूर सिर पर जरूरी सामान का बोझ और गोद में बच्चे को लेकर अपने प्रदेश निकल गए। रास्ते में कुछ देर का आराम, लंगर वालों से मिला खाने का पैकेट इन मजदूर वर्ग के लोगों के लिए जैसे अमृत का काम कर रहे थे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इनकी सुध लेने में देरी कर दी। समय रहते कॉलोनी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब तबके के लोगों की ओर अधिकारियों ने ध्यान दिया होता तो शायद उनके पलायन को रोका जा सकता था। जब प्रशासन की नींद खुली तो ज्यादातर मजदूर शहर की सीमा पार कर चुके थे। हालांकि उसके बाद प्रशासन ने लोगों के ठहरने व खाने की व्यवस्था कर दी है। हाल ही में दीनदयाल अंत्योदय योजना नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन (डे-एनयूएलएम) योजना के तहत एक सर्वे किया गया था। निगम और पंजाब यूनिवर्सिटी के सहयोग से किए गए सर्वे में सामने आया था कि चंडीगढ़ में 2 हजार लोग ऐसे हैं, जिनका अपना घर नहीं है। यह लोग फुटपाथ, मार्केट के बरामदों व बस स्टैंड पर सोते हैं।
विज्ञापन
होटल बंद, लोगों ने घरों में काम करने से किया मना
सर्वे में पता चला कि 69.6 प्रतिशत लोग अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोगों ने सेक्टर-17 व 22 में अपना ठिकाना बनाया हुआ है। बाहर से आने वाले लोगों में 33 प्रतिशत लोग मजदूरी करते हैं। वहीं 18.3 प्रतिशत लोग रिक्शा चलाकर अपना पेट पालते हैं।
ज्यादातर लोग होटलों में बर्तन साफ करना, घरों में काम करना आदि काम करते हैं। कर्फ्यू के बाद होटल बंद हो गए, कोरोना के डर से लोगों ने घरों में आने से भी मना कर दिया। शहर बंद हुआ तो रिक्शा चालकों की आमदनी भी बंद हो गई। बस फिर क्या था लोगों ने बोरिया-बिस्तर समेटा और पैदल ही अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े।
48.9 प्रतिशत लोगों पास नहीं है आईडी
सर्वे के दौरान पता चला कि ज्यादातर लोगों के पास आईडी ही नहीं है। 48.9 प्रतिशत लोग अपनी आईडी नहीं दिखा सके। वहीं 51 प्रतिशत लोगों के पास आईडी तो थी, लेकिन वह दूसरे प्रदेशों की थी। ज्यादातर लोगों के पास आधार कार्ड थे। गिने चुने लोग ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी दिखा सके। आईडी से पता चला कि बाहर से आने वाले लोगों में 31 से 40 वर्ष तक के लोग चंडीगढ़ में ज्यादा काम करते हैं।
39.5 प्रतिशत लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं
सर्वे में पता चला था कि 39.5 प्रतिशत लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं हैं। 16.3 प्रतिशत में आंखों की समस्या है, वहीं 14 प्रतिशत लोगों में पेट की बीमारियां हैं। 25.5 प्रतिशत लोग तंबाकू खाते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर और गहरा प्रभाव पड़ता है।
पिछली पीढ़ी ने ऐसे ही बिताया जीवन
सर्वे में पता चला कि बाहर से आने वाले 97 प्रतिशत लोगों की पिछली पीढ़ियां चंडीगढ़ आकर ऐसे ही अपना जीवन यापन करती रहीं। समय निकलता गया और आगे की पीढी भी ऐसे ही अपना जीवन यापन करती रहीं। ज्यादातर लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति कभी नहीं आई। जब पूरा शहर बंद हो गया हो और खाने के लिए कोई विकल्प न बचा हो। इस कारण पहली बार पलायन का विचार मन में आया। 97.6 प्रतिशत लोगों को नहीं पता क्या है पीएम बीमा योजना
कोरोना में मजदूर या गरीब लोगों के स्वास्थ्य की बात होती है। सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चंडीगढ़ में बाहर से आए 97.6 प्रतिशत लोगों को पता ही नहीं है कि प्रधानमंत्री योजना क्या है। चंडीगढ़ में रहने वाले 68 प्रतिशत प्रवासी लोगों का बीमा ही नहीं है। यह तो मात्र एक योजना का हाल है। अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में भी इन्हें कोई जानकारी नहीं।
भाजपा के सर्वे में 50 हजार से अधिक रजिस्ट्रेशन
भाजपा ने अभियान शुरू कर श्रमिक एक्सप्रेस से लोगों को घर भेजने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू किया है। इसमें यूपी, बिहार, उड़ीसा व झारखंड जाने के लिए 50 हजार से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन किराया है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद का कहना है कि अभी तीन लोगों को प्राथमिकता देंगे, एक वह जो यहां किसी काम से आए और फंस गए, दूसरे छात्र व तीसरे बीमार लोग। शहर में लगभग एक हजार लोग ऐसे हैं, जो फंस गए हैं, वहीं लगभग 5 हजार छात्र हैं। सभी को भेजने के लिए प्रशासन व रेलवे से बात हो गई है। जल्द ट्रेनों की व्यवस्था की जाएगी।
15 प्रतिशत राज्य सरकार व 85 प्रतिशत किराया देगा रेलवे
अरुण सूद ने बताया कि प्रशासन से बात की है। कुछ कंपनियों को चालू कराया जाएगा ताकि जो लोग बेरोजगारी के चक्कर में यहां से जा रहे हैं उन्हें रोका जा सके। फिलहाल भाजपा की तरफ से खाना वितरित किया जाता रहेगा। लोगों को जाने के लिए 15 प्रतिशत किराया राज्य सरकार व 85 प्रतिशत किराया रेलवे देगा ताकि लोगों को सुविधा अनुसार उनके घर भेजा जा सके।
जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता के आधार पर घर भेजा जाएगा। चूंकि ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा दिया है, इसलिए अभी जरूरतमंद लोगों को छांटा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस अपनी ओर से भी फॉर्म भरवा रही है, जिससे संख्या दोगुनी हो जा रही है। ऐसे समय में राजनीति नहीं करनी चाहिए। - अरुण सूद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष