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सैलरी संकट: सिटको ने बैंक में गिरवी रखी नौ करोड़ की एफडी, लॉकडाउन से ठप पड़ा है कारोबार

Sat, 09 May 2020 12:38 PM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिटको) प्रबंधन ने सैलरी संकट से उबरने के लिए संपत्तियों को गिरवी रखना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के पहले माह में ही पैदा हुए सैलरी संकट से उबरने के लिए सिटको को 9 करोड़ रुपये की एफडी को बैंक में गिरवी रखना पड़ गया।
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बैंक ने 5 करोड़ रुपये सिटको को गिरवी एफडी की एवज में जारी किए हैं। अब सिटको सैलरी संकट से उबर जाएगा। लॉकडाउन के कारण सिटको में कारोबार शून्य हो चुका है। सिटको के सभी होटल और रेस्तरां बंद पड़े हैं। इस कारण से सिटको में कार्यरत 1000 से अधिक नियमित और आउटसोर्स से रखे गए कर्मचारियों के लिए सैलरी का संकट खड़ा हो गया है।

सिटको की कर्मचारी यूनियनों ने भी सिटको प्रबंधन से शीघ्र सैलरी संकट से उबारने के लिए कदम उठाने की मांग की थी। प्रबंधन ने मजबूरी में कुल 38 करोड़ रुपये की एफडी में से 9 करोड़ की एक एफडी को बैंक में गिरवी रखवा दिया। इसकी एवज में मिले 5 करोड़ रुपये से सिटको में कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी और अन्य जरूरी खर्चे पूरे किए जाएंगे।   
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.50 प्रतिशत का ब्याज पर होगा नुकसान

सिटको 5 करोड़ रुपये पर 5.5 प्रतिशत ब्याज बैंक को देगा। इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि इस एफडी पर सिटको को सिर्फ 5 फीसदी ही बैंक की तरफ से ब्याज दिया जा रहा है। कुल मिलाकर ब्याज के इस खेल में सिटको को .50 प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ेगा।    

बकाया वसूलने में की गई लापरवाही   
सिटको प्रबंधन ने 7 करोड़ रुपये की वसूली पर लापरवाही बरती है। यदि समय से सिटको के प्रबंध तंत्र द्वारा यूटी व अन्य बकाएदारों से किराया और बकाया लेने की प्रक्रिया की जाती तो लॉकडाउन में यह सैलरी संकट खड़ा ही नहीं होता।   

ज्वॉइंट एक्शन कमेटी बोली- एमडी जिम्मेदार   
सिटको ज्वॉइंट एक्शन कमेटी के सदस्य प्रेमलाल, बलवीर और राजीव कोहली ने सिटको के खराब हुए हालातों के लिए एमडी को जिम्मेदार ठहराया है। कमेटी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के सैलरी संकट से उबरने के लिए एमडी ने गंभीरता नहीं दिखाई। इस कारण यूटी प्रशासन की ओर से मांगी गई 20 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी नहीं हो पाई।   
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