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नदी-नाले पार करके पहुंचे थे...सहारनपुर में लाठीचार्ज, श्रमिकों से भरी हरियाणा की 50 बसें लौटाईं

Mon, 18 May 2020 10:36 AM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
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प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला
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नदी-नाले पार करके अपने गांव जाने के लिए बेचैन श्रमिकों को पुलिस की लाठियों का शिकार होना पड़ रहा है। राज्यों में आपसी तालमेल की कमी के चलते मजदूर कच्चे रास्तों को पकड़ हाईवे की तलाश कर रहे हैं। केंद्र सरकार की नजर हाईवे की दिल दहला देने वाली तस्वीर पर पड़ी तो राज्य सरकारों को श्रमिकों को रोकने के लिए कहा गया, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया।
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अब हालात ये हैं कि पंजाब में हालात खराब होते देख यह श्रमिक हरियाणा के कच्चे रास्तों के माध्यम से जाना चाह रहे हैं, लेकिन दोनों राज्यों की पुलिस की लाठियां इन पर भारी पड़ रही हैं। हरियाणा के डीजीपी लगातार पंजाब के डीजीपी से इस बाबत संपर्क में है। प्रयास यही है कि स्थितियां सामान्य हो जाएं।

ऐेसे में ताजा घटनाक्रम यह है कि सहारनपुर बार्डर के रास्ते उत्तर प्रदेश भेजे जाने वाले इन कामगारों को लेकर जाने वाली बसों की संख्या घट जाएगी। रोजाना जहां 50 बसें जाती थीं, सोमवार से यह कोटा कम हो जाएगा। सहारनपुर के रास्ते जाने वाले इन 1500 श्रमिकों को वहां लाठीचार्ज होने के कारण वापस भेज दिया गया है। अब इन्हें शिविर में रोकने की व्यवस्था की जा रही है।
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यमुनानगर में लाठीचार्ज की अकेली घटना नहीं है, जिससे इन श्रमिकों का हौसला टूटा है, बल्कि कुछ दिन पहले पंजाब के रास्ते अंबाला पहुंचे श्रमिकों को भी पुलिस की धमकी का शिकार होना पड़ा। पंजाब पुलिस ने इन श्रमिकों को धमका कर बॉर्डर पार करवा दिया और हरियाणा पुलिस ने वापस भेजा तो लेने से इनकार कर दिया। बाद में इन्हें अंबाला में रखा गया। रविवार को भी शंभू बार्डर पर हाईवे पर श्रमिकों ने जाम लगाया।
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मैंने डीजीपी को कहा है कि कहीं भी बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जहां ऐसी स्थिति देखी जाए वहां पर सीनियर अधिकारी खुद जा कर श्रमिकों से बात कर स्थित नियंत्रित करें। मुझे पता चला था कि यमुनानगर में कुछ लोगों ने पत्थर चलाए जिसके बाद यह स्थिति बनी।
- अनिल विज गृह मंत्री हरियाणा

श्रमिक नहीं आए तो इंडस्ट्री चलनी होगी मुश्किल
जो लोग पहले के गए हैं, यदि वे वापस नहीं आते हैं तो इतना असर पड़ेगा कि इंडस्ट्री चल नहीं पाएगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट चालू होता है और पहले गए लोग वापस आते हैं तभी इंडस्ट्री चालू होगी। हालात ये है कि गुरुग्राम की जिन कंपनियों को 100 लोगों की इजाजत मिली है, वहां 80 ही आदमी आ रहे हैं। उनमें से भी लोग जाना चाह रहे हैं। धान लगाने के लिए जो मजदूर आते थे वे नहीं आएंगे तो कृषि भी प्रभावित होगी। चाहे कोई भी काम हो जो लोग श्रमिकों पर आश्रित हैं, उन्हें दिक्कत होगी।
- वीके मिश्रा, महासचिव आल इंडिया मैन पावर कांट्रेक्टर ऐसोसिएशन

यूपी के मजदूरों के लिए बसें
मध्यप्रदेश और बिहार जाने वाले श्रमिकों के लिए रेलगाड़ियां भेजी जा रही हैं। जबकि उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को बस के माध्यम से भेजा जा रहा है। ऐसे में एमएचए की गाइडलाइन हैं कि रिसीविंग स्टेट की एनओसी हो तभी इन श्रमिकों को भेजा जाए।
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