रिटायर हो चुके कर्मी, जो लॉकडाउन की वजह से दूसरा मकान नहीं देख पाए और अभी भी सरकारी आवास में ही रह रहे हैं, उन्हें प्रशासन की तरफ से राहत दी गई है। ऐसे कर्मियों को अभी सरकारी मकान खाली नहीं करना होगा। न ही उन्हें मार्च, अप्रैल और मई महीने में किसी तरह की कोई पैनल्टी लगेगी। प्रशासन के इस फैसले पर यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और एडवाइजर मनोज परिदा का आभार व्यक्त किया है।
एडवाइजर मनोज परिदा ने ट्वीट कर बताया कि मकान खाली करने की तिथि भी आगे बढ़ जाएगी। यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान बलविंदर सिंह और महासचिव डॉ. धर्मेन्द्र ने कहा कि सोसाइटी ने चंडीगढ़ प्रशासन को पत्र लिखा था कि रिटायर्ड कर्मचारी जो लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण कहीं पर अपना रहने का ठिकाना नहीं बना पाए, उनके लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाए ताकि कर्मचारियों को वर्तमान में दिए जा रहे किराए का 100 या 200 गुणा किराया न देना पड़े।
डॉ. धर्मेन्द्र ने बताया कि यदि रिटायर हुए कर्मचारी सरकारी मकान को रिटायरमेंट की तारीख से चार महीने तक खाली नहीं करते तो उन्हें अगले तीन महीने तक 100 गुणा और उसके बाद 200 गुणा किराया देना पड़ता है, जो कि कर्मचारियों की सामर्थ्य से बाहर की बात है। करीब 60 दिन से ज्यादा लाकडाउन लगने के कारण कर्मचारी अपना न तो कोई मकान खरीद सके, न ही बना सके हैं। लॉकडाउन के कारण अभी तक पेंशन के केस भी तैयार नहीं हुए हैं तो फिर बिना पैसे कर्मचारी मकान कैसे बनाते या खरीदते।
महासचिव डॉ. धर्मेन्द्र ने प्रशासन का धन्यवाद देने के साथ-साथ प्रशासन से मांग की है कि रिटायर्ड इंप्लाइज के पेंशनर बेनिफिट जल्द से जल्द जारी किए जाएं ताकि कर्मचारी अपना मकान बना सकें।