पंजाब से बाहर अपने राज्यों को जाने के लिए राज्य सरकार के पोर्टल पर अब तक 10 लाख से अधिक लोगों ने अपने नाम दर्ज करवाए हैं। राज्य में कर्फ्यू हटने के बाद लॉकडाउन के बीच दो-तिहाई उद्योगों में काम शुरू हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अब पोर्टल पर नाम दर्ज कराने वाले लोगों को फोन करके उनकी इच्छा पूछनी शुरू कर दी है कि क्या वे अब भी अपने राज्य लौटना चाहते हैं या पंजाब में रुकने के इच्छुक हैं?
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जहां सभी डिप्टी कमिश्नरों और जिला पुलिस प्रमुखों को यह यकीनी बनाने के निर्देश दिए हैं कि कोई भी प्रवासी कामगार पैदल अपने राज्यों के लिए न निकल सके और उनके भोजन की पूरी व्यवसथा की जाए, वहीं रविवार को पंजाब से 300वीं श्रमिक रेलगाड़ी उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुई। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि राज्य सरकार द्वारा पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो चुके सभी व्यक्तियों की प्रमाणिकता की जांच करने के साथ हर व्यक्ति को कॉल कर दोबारा पता लगाया जा रहा है कि क्या वह अपने गृह राज्य में वापसी के इच्छुक हैं या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इस तथ्य के मद्देनजर किया जा रहा है कि पिछले 3-4 दिनों से राज्य में दो-तिहाई औद्योगिक इकाइयों ने बंदिशों में ढील देने के साथ काम शुरू कर दिया है। इसके बाद पंजाब से बाहर जाने के इच्छुक व्यक्तियों की संख्या में बड़ी कमी आई है। कैप्टन ने इसे स्वागती संकेत करार दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार तब तक संबंधित राज्यों के लिए रेलगाड़ियां चलाए जाना जारी रखेगी, जब तक प्रवासी लोगों की तरफ से अपने राज्यों में जाने की इच्छा व्यक्त की जाती रहेगी।
मुुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की तरफ से प्रवासी कामगारों को वापस भेजने और खाना व यात्रा की सुविधा मुफ्त मुहैया करवाने के लिए अप्रैल के अंत में लिए फैसले के बाद से अब तक रेलवे को 20 करोड़ की अदायगी कर चुकी है।
अब तक राज्य से 3.90 लाख प्रवासी अपने राज्यों को रवाना
मुख्यमंत्री ने बताया कि रविवार को 300वीं श्रमिक रेलगाड़ी पटियाला से शाम 5 बजे उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो गई है। उन्होंने कहा कि रविवार तक पंजाब के जिलों से अलग-अलग राज्यों, जिनमें दक्षिणी भारतीय और उत्तर-पूर्वी राज्य भी शामिल हैं, के लिए 311 श्रमिक रेलगाड़ियों के जरिये 3.90 लाख प्रवासी कामगारों को भेजा जा चुका है। पंजाब में प्रवासी कामगारों को उनके घर से रेलवे स्टेशनों तक सरकारी बसों द्वारा यातायात की मुफ्त सुविधा दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से बसों द्वारा प्रवासी कामगारों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों तक बिना किराया वसूले भेजा गया है। राज्य हेडक्वार्टर और जिलों में तैनात पंजाब के अधिकारियों की तरफ से प्रवासियों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए सराहनीय काम किया गया है।
अन्य राज्यों में फंसे पंजाबियों से लिए सरकारें जिम्मेदारी निभाएं
कैप्टन ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से दूसरे राज्यों में फंसे पंजाबियों को वापस पंजाब लाने के लिए पूरा सहयोग दिया जा रहा है और जहां यात्रा के लिए वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ रही है, वहां मुहैया करवाई जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरे राज्यों, जहां हमारे लोग फंसे हैं, की सरकारें उन्हें यातायात सुविधा मुहैया करवाने की जिम्मेदारी निभाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी तरफ से पहले ही संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सभी पंजाबियों की मातृभूमि है और उन्हें वापस लाना हमारा फर्ज है।