लॉकडाउन की वजह से आमदनी आधी हो गई, जिसकी वजह से जिन लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर कोई काम शुरू किया है, वह सबसे ज्यादा परेशान हैं। इसकी वजह से आम लोग, छोटे दुकानदार, युवा उद्यमी, छोटे-बड़े व्यापारी, उद्योगपति प्रभावित हैं। उद्योग व्यापार मंडल (चंडीगढ़) ने लिखित में प्रशासन से बैंक कर्ज के ब्याज से राहत की मांग की थी। हालांकि, यह प्रशासन के हाथ में नहीं है, लेकिन व्यापारियों व उद्योगपतियों का कहना है कि प्रशासन केंद्र के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है। संयोजक कैलाश चंद जैन का कहना है कि कोरोना महामारी और मिनी लॉकडाउन की वजह से व्यापारियों का समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए कम से कम 6 महीने के समय को अनिश्चितता का दौर मानते हुए व्यापारियों की सभी प्रकार की सरकारी देनदारियों को निरस्त कर दिया जाना चाहिए।
दूसरों से किराया माफ करने का आग्रह, खुद वसूल रहे जुर्माना
17 मई को ही प्रशासक बदनौर ने शहरवासियों से आग्रह किया था कि अगर उनके पास कोई किराये पर रहता है तो उससे आधा ही किराया लें, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से सभी व्यक्तियों की आमदनी पर काफी असर पड़ा है। दूसरी ओर, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड समेत कई सरकारी विभाग किराया माफ करना तो दूर जो किराया जमा नहीं करा पा रहे हैं, उनसे जुर्माना भी वसूल रहे हैं। उदाहरण के लिए स्मॉल फ्लैट में रहने वाले हजारों लोगों से सीएचबी किराया तो वसूल ही रहा है, लॉकडाउन में जो किराया नहीं जमा कर पा रहे हैं, उनसे जुर्माने के तौर पर 12 प्रतिशत का ब्याज भी वसूल रहा है। लोगों की मांग है कि सीएचबी की तरफ से कोरोना काल में कम से कम किराये पर ब्याज न वसूला जाए।
विभिन्न व्यापारियों, बाजार संघों और उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनके सुझाव लिए थे। उन्होंने जिन-जिन मदों में राहत की मांग की थी, उनकी एक रिपोर्ट बनाकर प्रशासक को भेज दी है। अब प्रशासक ही राहत देने संबंधी कोई फैसला लेंगे। - मनदीप सिंह बराड़, डीसी
हमारे पास सभी के सुझाव आ गए हैं। लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स, बिजली बिल आदि को माफ करने का आग्रह किया है, लेकिन चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश हैं। ऐसे में हम ज्यादा कुछ राहत नहीं दे सकते हैं। - मनोज परिदा, सलाहकार, यूटी प्रशासक