देश के दूसरे बड़े हेल्थ सेंटर में पहले हार्ट ट्रांसप्लांट के फेल होने के बाद अब लोग दूसरे ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की समीक्षा करने में जुट गए हैं।
पीजीआई में हार्ट ट्रांसप्लांट से पहले लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गई थी। साल 2011 से संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट की शुरुआत की गई थी।
अब तक नौ ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इनमें से चार मरीजों की मौत हो गई है, जबकि पांच अब भी जीवित हैं। वे अपना जीवन सामान्य आदमी की तरह बिता रहे हैं।
पीजीआई इन मरीजों पर बराबर निगरानी रख रहा है। मरीज भी पूरी तरह से एहतियात बरत रहे हैं। लिवर ट्रांसप्लांट से जुड़े पीजीआई के डॉक्टरों का कहना है कि ट्रांसप्लांट की शुरुआत है।
प्रोसेस धीरे-धीरे प्रेक्टिस में आता है। जहां भी लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं, वहां का इतिहास बताता है कि शुरुआत में वहां भी ट्रांसप्लांट फेल हुए हैं और बाद में सक्सेसफुल।
जरूरत है कि सिर्फ अंगदान के प्रति जागरूकता की जाए। ज्यादा से ज्यादा अंगदान होंगे तो प्रेक्टिस भी तेज होगी। पीजीआई से मिली जानकारी के अनुसार, संस्थान में लिवर ट्रांसप्लांट के हर हफ्ते से चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं।
ऐसे में मरीजों को थोड़ा संशय भी है कि उनका ट्रांसप्लांट सक्सेस होगा कि नहीं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि पीजीआई का लीवर ट्रांसप्लांट अब पूरी तरह से सक्सेस हैं।
इस दिशा में अब बेहतर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस रीजन में सबसे ज्यादा लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। लिवर सिरोसिस में ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
लिवर सिरोसिस ज्यादा शराब पीने की वजह से होता है। हालांकि, अब बिना शराब पीने वालों में भी लिवर सिरोसिस की शिकायत आ रही है। इसमें लिवर पूरी तरह से डैमेज हो जाता है। इसमें भी लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।