चंडीगढ़। जिंदगी भर हर कदम पर एक-दूसरे का साथ निभाने वाले सेक्टर-30 के तीन दोस्त भरत, शिवांशु और नीतिश ने आखिरी दम तक एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। हरिद्वार के गंगनहर में डूबे तीनों किशोरों का शनिवार को सेक्टर-25 श्मशान घाट में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। तीनों की अंतिम यात्रा और एक साथ उठती चिताओं का दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
जब तीनों के पार्थिव शरीर श्मशान घाट पहुंचे तो पूरा माहौल गम में डूब गया। सेक्टर-30 के लोग हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हर किसी की जुबान पर बस यही बात थी कि जो दोस्त बचपन से हर पल साथ रहे, उनकी अंतिम विदाई भी साथ ही हो रही है।
भरत को उनके भाई अंशू ने शेड नंबर-4बी में मुखाग्नि दी। शिवांशु का अंतिम संस्कार उनके ताऊ सुनील ने शेड नंबर-2बी में किया जबकि नीतिश को उनके पिता राजेश ने शेड नंबर-3बी में मुखाग्नि दी। लगभग एक ही समय पर तीनों चिताएं जल उठीं और श्मशान घाट का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया।
हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ था दिनचर्या का हिस्सा
भरत, शिवांशु, नीतिश और हादसे में जान गंवाने वाला रोहित बचपन के अभिन्न मित्र थे। तीनों सेक्टर-30 में एक-दूसरे के घरों के पास रहते थे। साथ खेलना, साथ पढ़ना और हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इस वर्ष वे दूसरी बार एक साथ हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित होगी।