शराब ठेकों के आवंटन के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू की जाएगी और ई-नीलामी 13 मार्च से शुरू होगी। इंडियन मेड फॉरेन लिकर का कोटा पहले की तरह ही रहेगा जबकि देसी शराब और इम्पोर्टेड फॉरेन लिकर के कोटे में बढ़ती मांग को देखते हुए वृद्धि की गई है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने नई एक्साइज पॉलिसी 2025-26 जारी कर दी है। इसमें शराब के दाम नहीं बढ़ाने का फैसला लिया गया है लेकिन देशी और इम्पोर्टेड विदेशी शराब का कोटा बढ़ा दिया गया है।
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इस बार विभाग 97 शराब ठेकों की नीलामी करेगा, जिसमें सबसे महंगा ठेका पलसोरा का होगा, जिसकी कीमत 10.22 करोड़ रुपये रखी गई है।
शराब ठेकों के आवंटन के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू की जाएगी और ई-नीलामी 13 मार्च से शुरू होगी। इंडियन मेड फॉरेन लिकर का कोटा पहले की तरह ही रहेगा जबकि देसी शराब और इम्पोर्टेड फॉरेन लिकर के कोटे में बढ़ती मांग को देखते हुए वृद्धि की गई है।
देशी शराब का कोटा 18 लाख प्रूफ लीटर से बढ़ाकर 20 लाख प्रूफ लीटर, इम्पोर्टेड विदेशी शराब का कोटा 6.8 लाख से बढ़ाकर 8 लाख प्रूफ लीटर और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) का कोटा 117.40 लाख प्रूफ लीटर पर स्थिर रखा गया है। वहीं, एल-1एफ लाइसेंस के लिए अब 1 साल का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है।
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शराब के ठेकों की नीलामी में हिस्सा लेने के लिए पहले की तरह ही दो लाख रुपये चुकाने होंगे। हालांकि, निर्यात शुल्क को थोड़ा बढ़ाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी ने शराब बेचने के दौरान तय दामों का उल्लंघन किया तो ठेके को तीन दिन के लिए सील कर दिया जाएगा।
अवैध शराब बिक्री रोकने और इन्वेंट्री ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम अनिवार्य कर दी गई है। शराब के आयात निर्यात के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रत्येक वाहन में जीपीएस सिस्टम होना अनिवार्य होगा। अब एलवन-एफ लाइसेंसधारी का गोदाम वेयरहाउस से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर होना चाहिए और वेयरहाउस चंडीगढ़ में ही होना चाहिए। माइक्रोब्रूअरी और बीडब्ल्यूएच टू लाइसेंसधारियों को हर तीन महीने में अपने शराब बीयर की गुणवत्ता की जांच करानी होगी।
2024-25 में लाइसेंस फीस का शुरुआती भुगतान 13 फीसदी था, जिसे 2025-26 में बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बैंक गारंटी की राशि 5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दी गई है। 2024-25 की नीति में डिपार्टमेंटल स्टोर्स को एल-10बी लाइसेंस के तहत शराब बेचने की अनुमति थी। 2025-26 की नीति में एल-10बी लाइसेंस को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पहले से मौजूद लाइसेंस धारकों को 31 मार्च 2025 तक स्टॉक खत्म करने की अनुमति दी गई है।
800 करोड़ कमाने का रखा लक्ष्य, पिछली बार रखा था 1000 करोड़
यूटी प्रशासन ने पिछले साल 97 ठेकों की नीलामी कर करीब 1000 करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सिर्फ 89 ठेके ही बिके। बाद में 4 ठेके बंद भी हो गए। ऐसे में एक्साइज विभाग को 743 करोड़ की ही आमदनी हुई थी। इस बार प्रशासन ने 800 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि शराब विक्रेताओं का कहना है कि इस बार भी विभाग के सारे ठेके नहीं बिकेंगे, क्योंकि शराब विक्रेताओं ने जो राहत की मांग की थी, वो नहीं मिली है। अब पंजाब में शराब सस्ती है, इसलिए ठेकेदार पंजाब की तरफ रुख कर रहे हैं।
कलेर वाइंस के दर्शन सिंह कलेर ने कहा कि सिर्फ साल बदला है। बाकी सब कुछ वही है। शराब विक्रेताओं ने कई सुझाव दिए थे, जिसमें से एक को भी लागू नहीं किया गया है। न एक्साइज कम की, न वैट घटाया है। इसकी वजह से इस बार भी शराब के सभी ठेकों के बिकने की संभावना कम हो गई है।