पंजाब सरकार की ओर से हाल ही में एक्साइज एक्ट में किए गए संशोधन को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
संस्था एराइव सेफ ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सरकार परिभाषा बदलकर हाईवे किनारों पर पहले की तरह ही शराब के ठेके चलाना चाहती है।
संशोधन को हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करार देते हुए संशोधन रद्द करने की मांग की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने हाईवे किनार से शराब के ठेके न दिखने और आसान पहुंच न होने का आदेश जारी किया था। नेशनल हाईवे के संबंध में अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन स्टेट हाईवे संबंधी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।
याचिका में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने 21 मार्च को एक्साइज एक्ट-1914 में संशोधन के तहत प्रावधान तय किया कि नेशनल और स्टेट हाईवे पर शराब के ठेके चलाये जाने पर प्रतिबंध वहां लागू नहीं होगा, जहां नेशनल और स्टेट हाईवे का हिस्सा
नगर निगम, म्यूनीसिपल कमेटी, एनएसी, नगर परिषद या कैंटोनमेंट बोर्ड के दायरे में आते हैं।
वहीं नेशनल और स्टेट हाईवे से शराब के ठेके दिखाई देने के मामले में तय किया गया है कि जिन इमारतों में ठेकों के बाहर साइन बोर्ड, दिशा सूचक या अन्य किसी भी तरह का डिस्प्ले नहीं होगा, वहां ठेके खोले जा सकेंगे।
याची ने कहा है कि इससे साफ है कि बिना डिस्प्ले और साइन बोर्ड के भी अब नेशनल और स्टेट हाईवे पर शराब के ठेके खोले जा सकेंगे। हाईकोर्ट को बताया गया है कि पहले की तरह ठेके चलाने के लिए सरकार ने केवल परिभाषा बदल दी है। नए प्रावधान भी हाईकोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें नेशनल हाईवे से ठेके न दिखने का जिक्र किया गया था।
उल्लेखनीय है कि संस्था ने पहले दायर याचिका में कहा था कि हाईवे किनारों पर ठेके होने के कारण बाहर वाहन खड़े होते हैं और ऐसे वाहन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। लिहाजा हाईवे किनारे पर ठेके नहीं होने चाहिए।