आबकारी एवं कराधान उपायुक्त व आयुक्त की तरफ से जारी होलोग्राम की मात्रा और स्टाक में काफी अंतर पाया गया। कैग ने करनाल की एक डिस्टिलरी में 54.70 लाख होलोग्राम का दुरुपयोग होने की आशंका जताई है। उसके मुताबिक उस डिस्टिलरी को 2019-21 तक 16.22 करोड़ होलोग्राम तक दिए गए, जबकि उसके स्टाक रजिस्टर में 15.68 करोड़ होलोग्राम का ही रिकॉर्ड मिला।
मिलावटी शराब की बिक्री रोकने के लिए यह जरूरी
पंजाब डिस्टलरीज नियम, 1932 के नियम 17 में यह प्रावधान है कि लाइसेंस धारक डिस्टलरी में तैयार होने वाली शराब और स्प्रिट के नमूनों की जांच कराएगा। नकली और मिलावटी शराब की बिक्री रोकने के लिए यह अनिवार्य है।
विभाग और डिस्टलरी के अपने तर्क
आबकारी एवं कराधान विभाग ने कहा है कि सभी डिस्टिलरी की पूरी निगरानी कर रहे हैं। फ्लो मीटर लगाने की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे लगाने का काम प्रगति पर है। होलोग्राम मामले की जांच कराने कराई जा रही है। शराब डिस्टलरी के अधिकारियों ने कैग को बताया कि रासायनिक प्रमाणपत्र देरी से मिलने की स्थिति में शराब की बिक्री रोकी नहीं जा सकती। इससे शराब की बिक्री बुरी तरह प्रभावित होगी।
होलोग्राम जरूरी क्यों
होलोग्राम शराब को पहचानने का आधार है। इलेक्ट्रॉनिक मोड में 10 अंकों की संख्या बनाकर होलोग्राम पर मुद्रित की जाती है। मिलावटी शराब से बचाव के लिए होलोग्राम की कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की गई है। शराब को पूरी तरह जांचने-परखने के बाद ही होलोग्राम लगाया जाता है। लेकिन, हरियाणा में बिना जांच प्रमाणपत्र के होलोग्राम शराब की बोतलों पर चिपकाए जा रहे हैं।
बीते साल 15 करोड़ से अधिक बोतल बिकीं
- अंग्रेजी शराब की 12 करोड़ बोतल
- देशी शराब की 2.88 करोड़ बोतल
- विदेशी शराब की 75 लाख बोतल