कालका रेलवे क्वार्टर के पास 26 जनवरी को मिली अनामिका को बुधवार को सेक्टर-15 के शिशु गृह में भेज दिया गया।
सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल स्थित निकू वार्ड में 37 दिनों के उपचार के बाद अनामिका मेडिकली फिट होकर तो शिशु गृह चली गई, लेकिन एक मां की तरह पालने वालीं नर्सों से मानो ‘जिगर का टुकड़ा’ ही छिन गया।
अनामिका निकू वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों और डाक्टरों के आंखों का तारा बन चुकी थी। इसलिए उसके अस्पताल से डिस्चार्ज होते समय इन नर्सों के आंसू छलक गए।
अनामिका को शिशु गृह ले जाने के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी पंचकूला के चेयरपर्सन देवेंद्र कुमार, जिला चाइल्ड वेलफेयर आफिसर बीरेंद्र सिंह व हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के प्रोजेक्ट अधिकारी सुधीर कांत पहुंचे थे।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. रोहित ने कागजी कार्रवाई पूरी कर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करके अधिकारियों को सौंप दिया।
बच्ची के साथ बिताए पल को याद कर भर आईं आंखें
शाम की ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स तनु ने बताया कि एक सप्ताह पहले रात को आई बारिश और बिजली कड़कने की आवाज से अनामिका डर गई थी।
गोद में उठाते ही बच्ची सो गई और उसे रातभर गोद में ही सुलाना पड़ा था। अनामिका के साथ वार्ड में तैनात सभी नर्सों का मां-बेटी जैसा रिश्ता बन गया था।
तनु ने बताया कि बुधवार को जब हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के अधिकारी अस्पताल पहुंचे, तभी आभास हो गया कि अब अनामिका को शिशु गृह भेजा जाना है।
शायद अनामिका को भी इसका आभास हो गया था। वह रोने लगी और जैसे ही उसे गोद में लिया, चुप हो गई। ये बातें सुनाते-सुनाते तनु की आंखें भर आईं।
वहीं, डा. संध्या रानी ने बताया कि अनामिका के रोने की आवाज तक सभी पहचानने लगे थे। वह सबके जिगर का टुकड़ा बन चुकी है।
ऐसे ले सकते हैं गोद
चंडीगढ़ सेक्टर-16 स्थित हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के कार्यालय में जाकर आवेदन करना होगा, जिसमें गोद लेने वाले दंपति का पर्सनल डाटा होगा।
परिषद के प्रोजेक्ट अधिकारी सुधीर कांत ने बताया कि पति-पत्नी की काउंसिलिंग होगी। इसके बाद दंपति को एक हजार रुपये का फार्म दिया जाएगा, जिसमें जन्म तिथि, प्रमाण पत्र, इनकम प्रूफ, मेडिकल सर्टिफिकेट, बैंक प्रूफ व तीन गवाहों के साइन संलग्न करने होंगे।
गवाहों के साइन फार्म पर ही होंगे। इसके अलावा पांच हजार का डिमांड ड्राफ्ट देना होगा। उसके बाद प्री अडॉप्शन फोस्टर केयर कस्टडी के रूप में बच्ची दी जाएगी।
केंद्र सरकार के नियम के अनुसार, बच्ची को गोद देेने से पहले मेडिकल जांच व अन्य प्रक्रियाएं भी पूरी की जाएगी।
थोड़ा लग सकता है वक्त
जब बच्ची मिली थी, उसके 90 दिनों के भीतर पुलिस नॉन ट्रेसिंग रिपोर्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंपेगी। उसके बाद ही अनामिका को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।