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रंगमंच पर निराले अंदाज में दिखी साहित्य के सूर्य की जीवन गाथा

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चंडीगढ़। राम की शक्ति पूजा, गर्म पकौड़ी, चमेली, कुल्ली भाट जैसी हिंदी साहित्य की अलग अलग विधाओं से जुड़ी दर्जनों रचनाएं देने वाले सूर्य कांत त्रिपाठी निराला को एक रचनाकार से इतर प्रस्तुत किया गया। उनकी लेखनी से हटकर उनके जीवन वृत्त से जुड़ी मार्मिक और बेहद हृदयस्पर्शी घटनाक्रमों को रंगमंच पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को एक अलग परिकल्पना से रूबरू कराया गया। मौका था सेक्टर- 23 स्थित बाल भवन के नवरंग हॉल में मंगलवार को आयोजित नीलकंठ निराला नाटक के मंचन का। इसमें कलाकारों ने हिंदी साहित्य के सूर्य माने जाने वाले सूर्यकांत त्रिपाठी निराले के जीवन से जुड़ी रोचक घटनाओं को निराले अंदाज में पेश किया।
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नाटक में कलाकारों ने निराला के अंतिम दिनों के एकाकीपन के साथ ही उनके फक्कड़पन और हिंदी के प्रति अथाह प्रेम को दर्शाया। निराला की भूमिका निभा रहे हेमंत माहौर ने उनके चरित्र के साथ पूरा न्याय करने का सफल प्रयास किया। वहीं निराला के आसपास के महत्वपूर्ण लोगों जैसे मनोहरा, हजारी दादा, श्यामलाल, सिन्हा, उतरा, बुढ़िया, डाकिया और सरोज के कैरेक्टर को भी क्रमश: शारदा सिंह, अभिषेक शर्मा, मो. जफ्फर आलम, धीरज कुमार, मेघना पंचाल, शारदा सिंह, मुकेश कुमार और नेहा निहारिका ने बखूबी पेश किया।
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