कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सोशोलॉजी विभाग की लाइब्रेरी से किताबें इशू नहीं हो रही। इसके चलते विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थी पढ़ाई बाधित होने की बात कह रहे हैं।
वहीं विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खडे़ किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यूनिवर्सिटी के उपरोक्त विभाग की लाइब्रेरी से इन दिनों बुक्स इशू नहीं हो रही है।
लाइब्रेरियन लंबे अवकाश पर हैं और अधिकारियों ने इसकी वैकल्पिक प्रबंध भी नहीं किया गया है। इस कारण विद्यार्थी बुक्स इशू कराने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई भी अमल नहीं कर रहा।
उन्हें विभाग द्वारा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की मेन लाइब्रेरी से किताबें इशू कराने की सलाह दी जा रही है। विद्यार्थियों ने बताया कि पुस्तकालय का चार्ज एक महिला शिक्षक के पास है और वह मां बनने के कारण इन दिनों अवकाश पर हैं।
विद्यार्थियों ने कहा कि महिला शिक्षक की तो अवकाश पर जाना मजबूरी है, लेकिन इसका वैकल्पिक प्रबंध तो किया ही जा सकता है।
परेशानियां झेल रहे विभाग के विद्यार्थी
लाइब्रेरियन न होने की वजह से विभाग के विद्यार्थी परेशानियां झेल रहे हैं। उन्हें किताबें इशू नहीं हो रही और सेंट्रल लाइब्रेरी में भी अधिक भीड़ की वजह से वे काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि अगर लाइब्रेरियन अवकाश पर है, तो विभाग को इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, जबकि ऐसा नहीं हो रहा।
मेन लाइब्रेरी आने-जाने में लगता है काफी समय
विद्यार्थियों का कहना है कि लेक्चर फ्री होने के कारण लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ा जा सकता है, लेकिन अगर वे सेंट्रल लाइब्रेरी में जाते हैं, तो फिर आने-जाने में ही लेक्चर खत्म हो जाएगा और उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।
वैसे भी मेन लाइब्रेरी में काफी भीड़ रहती है और किताब इशू होने में काफी समय लग जाता है। इसलिए विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
सेंट्रल लाइब्रेरी भी है, वहां से हो सकती हैं बुक्स इशू
विभाग के चेयरमेन प्रेम कुमार का कहना है कि महिला शिक्षका के पास लाइब्रेरी का चार्ज है और उनके अवकाश पर होने के कारण यह समस्या है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल सेंट्रल लाइब्रेरी से किताबें इशू कराई जा सकती हैं, लेकिन विद्यार्थी बिना वजह ही इस मुद्दे को उठा रहे हैं।
यह मुद्दा है ही नहीं। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से इतनी सुविधाएं विद्यार्थियों को दी जा रही हैं, उनके विषय में किसी ने कुछ नहीं कहा और जब थोड़ी सी समस्या हुई है, तो उसका मुद्दा बना दिया गया। उन्होंने कहा कि फिर भी वे अपने स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास करेंगें।