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World Mental Health Day: सोशल आइसोलेशन से बचें, आपस में कम होता दायरा बन रहा मनोरोग का कारण

Mon, 10 Oct 2022 04:19 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. देवाशीष बासू का कहना है कि मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के दौर ने छोटे बच्चों का मानसिक स्तर प्रभावित कर दिया है।
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बाद मानसिक तनाव का स्तर बड़ों से लेकर बच्चों तक में सामने आने लगा है। यह तनाव मानसिक विकार का कारक बन रहा है। मनोरोग विशेषज्ञ इससे बचाव के लिए लोगों को एक-दूसरे से मिलने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि महामारी के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए सोशल आइसोलेशन की सलाह दी जा रही थी लेकिन अब लोग उसके आदी हो गए हैं। 

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भागदौड़ की जिंदगी में लोग समय होने पर भी एक दूसरे से मिलने और बात करने से कतराने लगे हैं। मोबाइल और अन्य स्क्रीन माध्यमों के साथ समय बिताने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।  

पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. देवाशीष बासू का कहना है कि मानसिक रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कोरोना के दौर ने छोटे बच्चों का मानसिक स्तर प्रभावित कर दिया है। उनमें तनाव का स्तर बढ़ने लगा है। इससे एकाग्रता भंग होने के साथ घबराहट, चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि माता पिता बच्चों को समय दें। उनसे खुलकर बातें करें। उनकी बातें सुनें। यथासंभव संयुक्त परिवार की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास करें। 
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पीजीआई की पूर्व मनोरोग विशेषज्ञ प्रो. आदर्श कोहली का कहना है कि कोरोना ने परिवार के सभी सदस्यों को एक-दूसरे का भरपूर समय दिया जिससे लोगों ने एक-दूसरे की अच्छी और गलत दोनों चीजों को करीब से जाना। इससे भी दूरियां बढ़ी हैं, जो मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। 

तनाव युवा वर्ग को सबसे ज्यादा कर रहा प्रभावित, हो जाएं सचेत 
पीजीआई के मनोचिकित्सक डॉ. राहुल चक्रवर्ती का कहना है कि युवाओं को सचेत होने की जरूरत है क्योंकि यह वर्ग मानसिक तनाव से ज्यादा प्रभावित हो रहा है। ज्यादा पाने की चाह, आगे निकलने की दौड़, दुनिया का डर, समय की कमी, परिवार से दूरी, शौक के लिए समय न होना, तनाव का बढ़ता स्तर, काम का दबाव और कार्यक्षेत्र में तनाव मानसिक रोगी बना रहा है। 

ऐसे में जरूरी है परिवार के साथ समय बिताएं और शौक विकसित करें। इसके अलावा योग, ध्यान और आहार पर विशेष ध्यान दें। सबसे जरूरी है कि तनाव का स्तर बर्दाश्त से बाहर होने पर नजरअंदाज न करें और तत्काल विशेषज्ञ की सलाह लें। 
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मानसिक तनाव दूर करना है तो इसे आजमाएं 
- मानसिक तनाव को कम करने के लिए अपनी समस्याओं को परिजनों और दोस्तों से साझा करें।
- एक्सरसाइज, योग, ध्यान और खानपान पर ध्यान दें। 
- लोगों से मिले और बातें करें। 
- सकारात्मक विचारों को अपनाएं। 
- अच्छी पुस्तकें पढ़ें। 
- नींद पूरी लें, इससे काफी अच्छा असर पड़ेगा।
- सोशल मीडिया और कंप्यूटर पर काम कम करें। 
- बच्चों के साथ समय बिताएं। उन्हें इनडोर की बजाय आउटडोर गेम खेलने भेजें। 
-यदि समस्या ज्यादा बढ़े तो डॉक्टर के सुझाव लें। 

पीजीआई में बाल मनोरोगियों की बढ़ रही संख्या 
ओपीडी               2020        2019      2018
नए मरीज            13599      14887    20809
पुराने रोगी            75004     103074   72802
भर्ती मरीज             305          309     2484

बाल एवं किशोर मनोरोग क्लीनिक
ओपीडी               2020        2019        2018
नए रोगी               1171       1226        1069
पुराने रोगी             3494       2577        1777
भर्ती मरीज              103         72            49

ओपीडी में कुल मनोरोगियों की संख्या
2020-21       2019-20        2018-19
7197            16749             23946

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