चंडीगढ़ में एक साल बाद फिर से तेंदुए को देखा गया है। वन विभाग के कैमरे में इसकी चहलकदमी कैद हो गई है। सुखना वन्य जीव अभ्यारण्य के कांसल जंगल में जब वह रात में घूम रहा था तो उसकी तस्वीरें कैमरे में आ गई हैं। उसके पैरों के निशान भी मिले हैं। एक हिरण का आधा हिस्सा भी मिला है। जिसके बारे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि तेंदुए ने ही इसे मारकर खाया होगा। इससे पहले पिछले साल अप्रैल में जब लॉकडाउन लगा था तो चंडीगढ़ सेक्टर-5 में एक कोठी के अंदर तेंदुए की मौजूदगी देखी गई थी। उसके बाद उसे पकड़कर मोरनी के जंगल में छोड़ दिया गया था।
वन विभाग के डिप्टी कंजरवेटर डॉ. अब्दुल कय्यूम ने बताया कि सुखना वन्य जीव अभ्यारण्य में तेंदुए की मौजूदगी दिखाती है कि जंगल काफी स्वस्थ हैं। पानी और खाना प्रचुर मात्रा में है। यहां पर तेंदुए आते रहते हैं, लेकिन इतनी जल्द नहीं। हर एक डेढ़ साल में इनकी मौजूदगी दिखती है। यह बता पाना मुश्किल होगा कि वह कहां से आया था। फील्ड स्टाफ सतर्क है। कुछ सूचना मिलती है तो उसे सभी के साथ साझा किया जाएगा।
चंडीगढ़ और आसपास इलाके में आते रहे हैं तेंदुए
सिटी ब्यूटीफुल के आसपास जंगल का एरिया होने की वजह से तेंदुए आते रहे हैं। पिछले साल सेक्टर-5 में तेंदुआ आया था। उससे पहले बोटेनिकल गार्डन, एयरफोर्स स्टेशन, सुखना वन्यजीव अभ्यारण्य और पंचकूला के रिहायशी इलाकों में भी तेंदुए देखे गए या उनके निशान पाए गए। विशेषज्ञ बताते हैं कि रिहायशी इलाकों में आने के पीछे उनकी वजह पानी व भोजन होता है। जब उन्हें अपने जरूरत की चीजें नहीं मिलती हैं तो वे शहर की ओर रुख करते हैं।