बहिबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में कार्रवाई करते हुए पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को तलब किया गया है। वहीं पूर्व सीएम का कहना है कि ड्रामा करने की बजाय मुझे गिरफ्तार करें। अमर उजाला की तरफ से चरणजीत सिंह शर्मा की गिरफ्तारी के बाद ही खुलासा कर दिया गया था कि तत्कालीन डीजीपी सैनी तक पहुंचने का रास्ता तैयार हो चुका है।
एसआईटी ने सैनी को चंडीगढ़ स्थित पुलिस हेडक्वार्टर में 25 फरवरी को पेश होने के लिए कहा है। डीजीपी सुमेध सैनी इस मामले में सबसे बड़े अधिकारी हैं, जिनसे एसआईटी पूछताछ करेगी। सैनी उस समय पंजाब के डीजीपी थे, जब बहिबल कलां, बरगाड़ी और कोटकपूरा में घटनाएं घटी। सिखों पर गोलियां चलाने की घटना के बाद शिअद भाजपा सरकार ने सैनी को पद से हटा दिया था।
सैनी से पहले एसआईटी उनके करीबी रह चुके पूर्व एसएसपी चरणजीत शर्मा और मौजूदा आईजी परमराज सिंह उमरानंगल को मामलों में गिरफ्तार भी कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार उमरानंगल को गिरफ्तार करने के बाद जब अदालत में पेश किया गया तो वहां पर भी डीजीपी सुमेध सैनी के नाम को लेकर वकीलों में जिरह हुई थी।
एसआईटी उमरानंगल से यह पूछताछ कर रही थी कि उसको किसने निर्देश दिए थे जो वह लुधियाना सिटी से 182 लोगों को लेकर कोटकपूरा पहुंच गए। इसके बारे में उन्होंने विभागीय रिकार्ड में कुछ भी दर्ज नहीं किया। सैनी को अदालत ने गिरफ्तारी से राहत दे रखी है। उनको गिरफ्तार करने से पहले एसआईटी को एक सप्ताह का नोटिस जारी करना पड़ेगा। ऐसे में सैनी को जब 25 फरवरी को बुलाया गया है तो एसआईटी उनको गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।
ड्रामा करने के बजाय सरकार मुझे गिरफ्तार करे
पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती दी है कि वह कोटकपूरा और बहिबल कलां कांड को लेकर सियासी ड्रामा बंद करें। मुझे बताएं कि गिरफ्तारी देने केलिए मैं किस दिन, समय और कहां आऊं। पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए बादल ने कहा कि वह बीमारी की हालत में सुबह गांव से चल कर चंडीगढ़ आए हैं।
उन्होंने डीजीपी से फोन पर बात की है कि जब चाहो मैं गिरफ्तारी देने को तैयार हूं। पंजाब केसीएम और प्रदेश प्रधान चुनाव से पहले और बाद में आयोग, एसआईटी बनाते समय कहते आ रहे हैं कि बादलों को अंदर देना है। एसआईटी तो कैप्टन और सुखजिंदर रंधावा की बनानी चाहिए। यही इनकी सरकार का वन प्वाइंट एजेंडा है। विधानसभा में सीएम ने भाषण में भी यही कहा।
मुझे पता कि सब कुछ राजनीतिक है। इंसाफ या किसी मुद्दे से इनकी हमदर्दी नहीं है। यह चाहते हैं कि सिर्फ किसी तरह ऐसा माहौल बनाएं कि बादलों को गिरफ्तार कर लें। मेरी जिंदगी खुली किताब है, मैंने हमेशा संघर्ष किया है। कांग्रेस की धार्मिक, आर्थिक ज्यादतियों, इमरजेंसी के खिलाफ डट कर लड़ा हूं। इन्होंने मुझे बहुत बार जेल भेजा है। अब भी मैंने फोन कर कहा है कि बता देना किस थाने में पहुंचना है, पहुंच जाऊंगा।
मेरी खुशकिस्मती होगी कि मेरी आखिरी सांस अमरिंदर की जेल में आए। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं नहीं कह रहा कि मुझे जेल भेजो, यह तो इनकी मंशा है। पहले भी बड़े आरोप लगाए, पर बरी हुआ। मैं नेहरू, इंदिरा के आगे नहीं झुका तो ये क्या हैं। एक अन्य सवाल पर बादल ने कहा कि कांग्रेस का हमेशा से यही एजेंडा रहा है कि गुरुद्वारों पर कब्जा करना है।
पूर्व एसएसपी की न्यायिक हिरासत बढ़ी
बहिबल कलां गोलीकांड मामले में न्यायिक हिरासत के चलते पटियाला जेल में बंद पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा को वीरवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थानीय जेएमआईसी की अदालत में पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत को सात मार्च तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए।
बहिबल कलां मामले की जांच कर रही एसआईटी ने मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा को 27 जनवरी को उसके होशियारपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद 11 दिन के पुलिस रिमांड पर रहने के बाद सात फरवरी 2019 को अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।
उस दिन अदालत ने उन्हें फरीदकोट जेल भेजा था लेकिन जेल विभाग ने सुरक्षा कारणों के चलते उसे उसी दिन फरीदकोट से पटियाला जेल में शिफ्ट कर दिया था। वीरवार को न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश करके उनकी न्यायिक हिरासत में बढ़ोतरी करवाई गई।