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‘हॉकी के जादूगर’ ध्यानचंद की राह पर चलें, गर्मी की छुट्टियों में दे दना दन करें

Sun, 04 Jun 2017 09:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Hockey India
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‘हॉकी के जादूगर’ ध्यानचंद ने दुनिया भर में भारत का परचम लहराया। आज देश के नौजवान उन्हीं के नक्शेकदमों पर चल रहे हैं। हॉकी में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है। यह सब खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है। हॉकी टीम वर्क का खेल है। फील्ड में सब खिलाड़ियों के सहयोग से विरोधी टीम पर जीत हासिल की जा सकती है।
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शहर के युवा हॉकी को अपने कॅरियर की तरह भी चुन सकते हैं। यहां पर इस खेल के लिए बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। चंडीगढ़ स्पोर्ट्स कांप्लेक्स सेक्टर-42 इस खेल का सबसे बड़ा हब है। यहां रोज सुबह-शाम खिलाड़ी अभ्यास में जुट रहते हैं। वहीं सेक्टर-18 स्थित हॉकी स्टेडियम में हॉकी अकादमी के खिलाड़ी और कई स्कूलों के बच्चे सीखने के लिए, कई टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए अभ्यास करते हैं।

टर्फ पर खेला जाता है
एक समय में भारत में घास के मैदान पर हॉकी खेली जाती थी। वक्त के साथ इस खेल में बदलाव आया। आजकल हॉकी को नई तकनीक के जरिए टर्फ पर खेला जाता है। यह ओलंपिक गेम है और इसे ज्यादातर आउटडोर खेला जाता है।
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क्या होते हैं नियम

हॉकी - फोटो : getty
हॉकी में दो टीमें एक समय में एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं। हर टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। हर मैच में दो हाफ होते हैं। अगर दोनों हाफ में कोई भी टीम गोल नहीं कर पाती तो, एक्ट्रा टाइम दिया जाता है। अगर उसमें भी गोल नहीं हो पाता तो आखिरी विकल्प में पेनल्टी शूटआउट के जरिए मैच का फैसला किया जाता है।

यह है फीस
सेक्टर-42 के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स और सेक्टर-18 के हॉकी स्टेडियम में स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट की हॉकी अकादमी के खिलाड़ी खेलते हैं। इसके अलावा कई स्कूलों के लड़के और लड़कियां भी यहां पर सीखने आते हैं। यहां पर स्टूडेंट के लिए फीस 300 और नॉन स्टूडेंट के लिए 600 रुपये फीस पूरे साल की ली जाती है।

हॉकी एक टीम वर्क का खेल हैं। इसमें खिलाड़ी आपसी तालमेल के जरिए विरोधी टीम पर जीत दर्ज कर सकते हैं। ऐसा करने वाली टीम हमेशा सफल होती हैं।
- सुदेश, साई कोच
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