‘हॉकी के जादूगर’ ध्यानचंद ने दुनिया भर में भारत का परचम लहराया। आज देश के नौजवान उन्हीं के नक्शेकदमों पर चल रहे हैं। हॉकी में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है। यह सब खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है। हॉकी टीम वर्क का खेल है। फील्ड में सब खिलाड़ियों के सहयोग से विरोधी टीम पर जीत हासिल की जा सकती है।
शहर के युवा हॉकी को अपने कॅरियर की तरह भी चुन सकते हैं। यहां पर इस खेल के लिए बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। चंडीगढ़ स्पोर्ट्स कांप्लेक्स सेक्टर-42 इस खेल का सबसे बड़ा हब है। यहां रोज सुबह-शाम खिलाड़ी अभ्यास में जुट रहते हैं। वहीं सेक्टर-18 स्थित हॉकी स्टेडियम में हॉकी अकादमी के खिलाड़ी और कई स्कूलों के बच्चे सीखने के लिए, कई टूर्नामेंट की तैयारियों के लिए अभ्यास करते हैं।
टर्फ पर खेला जाता है
एक समय में भारत में घास के मैदान पर हॉकी खेली जाती थी। वक्त के साथ इस खेल में बदलाव आया। आजकल हॉकी को नई तकनीक के जरिए टर्फ पर खेला जाता है। यह ओलंपिक गेम है और इसे ज्यादातर आउटडोर खेला जाता है।