पानी के सम्मोहन में फंसे युवा और किशोर नहाने के लिए जान दांव पर लगाकर नदियों और नहरों में खतरे की छलांग लगाते हैं। दरअसल मई-जून में जैसे ही गर्मियां शुरू होती हैं, पंजाब की नदियों और नहरों से मातम की खबरें आने लगती हैं। चिलचिलाती धूप में पानी गजब का सम्मोहन पैदा करता है।
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इस सम्मोहन में फंसे युवा और किशोर नहाने के लिए जान दांव पर लगाकर नदियों और नहरों में खतरे की छलांग लगाते हैं। इनमें से कई ऐसे होते हैं जो छलांग के बाद फिर उबर नहीं पाते। उनकी तलाश गोताखोर करते हैं। लगातार हादसों के बावजूद इन जल-धाराओं के किनारे किसी पहरे की कोई व्यवस्था नहीं है। इस मामले में सिर्फ प्रशासन के भरोसे रहने से कुछ नहीं होगा। नहरों के किनारे गांवों और बस्तियों के लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, क्योंकि सवाल हमारे युवाओं और बच्चों की सुरक्षा का है।
जान जोखिम में डाल युवा करते हैं दरिया का रुख
पठानकोट में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है वैसे-वैसे युवा नहरों और दरियाओं का रुख करने लगते हैं। प्रशासन की ओर से कई ऐसे स्थानों नहाने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। बावजूद इसके युवक पानी में कूदते हैं और कई बार जान से भी हाथ धो बैठते हैं।
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इन स्थानों पर प्रतिबंध काठ का पुल स्थित रेलवे ट्रैक, हाईडिल नहर सुजानपुर, मलिकपुर मॉडल, माधोपुर नहर। यह ऐसे स्थान हैं जहां पाबंदी के बावजूद भी युवकों को अकसर नहाते देखा गया है। यह स्थान ऐसे हैं जहां कोई भी रेलवे अधिकारी एवं पुलिस कर्मचारी व नहरी विभाग कर्मचारी तैनात नहीं हैं। इस वर्ष नहर में नहाने के दौरान बीते सप्ताह हाईडिल नहर में दो युवकों की मौत हो चुकी है।
नहरी विभाग के एसडीओ राकेश पुंज का कहना है कि विभाग की ओर से नहरों, दरियाओं व अन्य विभागीय स्थानों पर नहाने पर पाबंदी लगाई गई है। कुछ स्थानों पर कर्मचारी तैनात हैं लेकिन कई स्थानों पर ऐसा होने के चलते युवक मनमानी करते हैं। विभाग की ओर से इन स्थानों पर पुलिस की सहायता ली जाती है। विभाग की ओर से इस ओर सख्त कदम उठाए जाएंगे। टीम विभिन्न स्थानों पर जाकर देखेगी। यदि युवक नहाते हुए पकडे़ गए तो कार्रवाई की जाएगी।
सरहंद नहर पर नहीं सुरक्षा के प्रबंध
नदियों में लगा रहे खतरे की छलांग
- फोटो : amar ujala
बठिंडा। गर्मी से राहत पाने के लिए नहर में नहाने उतरना जिले के दो लड़कों को इतना महंगा पड़ा कि वे अपनी जान ही गंवा बैठे। बच्चों के मौत होने की वजह जिला प्रशासन और नहरी विभाग की नालायकी को भी माना जा रहा है। क्योंकि सरहंद नहर के दोनों ओर सुरक्षा के कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इससे बच्चों को ऐसी घटनाओं से बचाया जा सके।
गर्मी से राहत पाने के लिए रजवाहे में नहाते हुए एक 16 वर्षीय लड़के की पानी में डूबने से मौत हो गई।
लड़के के शव कोेे दो घटों की मेहनत के बाद नौजवान वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों ने सिविल अस्पताल में पहुंचाया। वहां पर लड़के को मृत घोषित किया गया। पहला हादसा बीती 28 मई कोे दोपहर करीब साढे़ 3 बजे डबवाली रोड पर जोधपुर रोमाणा वाले रजवाहे पर हुआ। रजवाहे में कुछ लड़के गर्मी से राहत पाने के लिए नहाने गए थे। इनमें 17 वर्षीय कौशल कुमार निवासी संजय नगर को तैरना न आने की वजह से उसने खाली बोरी में थर्मोकोल भरकर बोरी को पकड़कर रजवाहे में छलांग लगा दी। इस दौरान बोरी उसके हाथ से छूट गई, वह पानी के तेज बहाव में बहकर डूब गया। इससे उसकी पानी में डूबने से मौत हो गई।
दूसरा हादसा तीन जून को गांव पूहला में उस समय हुआ जब सरहिंद नहर में एक बच्चे की डूबने से मौत हो गई। ज्यादा गर्मी में नरिंद्र सिंह (9) निवासी नथाना अपने साथियों समेत सरहिंद नहर में नहाने गया था। वह कूद तो गया, तैरना न आने से वह नहर में डूब गया। दूसरे बच्चों ने उसके डूबने की सूचना नहर के पास बैठे लोगों को दी। उन्होंने बच्चे को बाहर निकालकर नथाना के सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया। डॉक्टर ने नरिंद्र सिंह को मृतक करार दिया।
समाजसेवी विजय गोयल का कहना है कि परिजन अपने बच्चों का ध्यान रखें। उन्हें इस तरह से नहर और रजवाहे में नहाने से रोकें। समाजसेवी सोनू माहेश्वरी का कहना था कि जिला पुलिस प्रशासन और नहरी विभाग को नहर पर गश्त करनी चाहिए। उन बच्चों को नहाने पर जाने से रोकना चाहिए, जो खतरे वाली जगह पर छलांग लगाते हैं।
नदियों में लगा रहे खतरे की छलांग
- फोटो : amar ujala
फिरोजपुर। सतलुज दरिया से निकलने वाली गंगनहर हर साल इसमें नहाने वाले युवकों की बली लेती है। 10 मई को इस नहर में नहाने के लिए आठ युवक गए थे और चार की डूबकर मौत हो गई थी। इससे पहले भी कई बार नहाते समय इस नहर में डूबकर युवक मरे हैं। अब तो गांव बारेके के ग्रामीणों का कहना है कि ये नहर हर साल युवकों की जान लेती है। इस नहर में नहाने के लिए जिला प्रशासन ने पाबंदी लगाई हुई है। फिर भी युवक नहाने से बाज नहीं आते हैं।
10 मई को शांति नगर निवासी आठ युवक गांव बारेके से गुजरने वाली गंगनहर में नहाने के लिए गए थे। इनमें ईस्टबीर सिंह पुत्र दिलबाग सिंह, लव पुत्र जोगिंदर, विशाल पुत्र तरसेम, अनिल कुमार पुत्र विद्या लाल की नहर में डूब कर मौत हो गई। पारस पुत्र लेख राज, अवि, अनीष व देव बच गए थे।
पिछले साल भी इस नहर में दो युवक डूब कर मरे थे। जब इस नहर में हर साल डूब कर मरने की घटनाएं होने लगीं तो जिला प्रशासन ने नहरों में नहाने पर पाबंदी लगा दी थी।
उधर, फाजिल्का के खुईखेड़ा से गुजरने वाली नहर में कुछ माह पहले दो स्कूली बच्चे नहर में नहाते समय डूब कर मर गए थे।
खतरे से निपटने के लिए पटियाला तैयार इस बार मानसून सीजन में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए पटियाला तैयार है। करोड़ों की लागत से जहां एक तरफ ड्रेनों, नदियों की साफ-सफाई का काम कराया जा रहा है वहीं घग्गर दरिया के बांधों की मरम्मत का काम हो रहा है। झंबो वाली चौ के सभी पुल ऊपर उठाए जा रहे हैं। ये सारे काम 70 फीसदी पूरा हो चुके हैं। बाकी काम 30 जून तक पूरा होने की संभावना है।
तकरीबन हर साल पानी की मार झेलने वाला पटियाला जिला इस बार बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए तैयार बताया जा रहा है। इस बार ड्रेनेज विभाग ने पंजाब सरकार को प्रस्ताव भेजकर नदियों, ड्रेनों की सफाई और घग्गर दरिया के बांधों की मरम्मत के लिए आठ करोड़ का बजट मांगा था, जो मंजूर कर लिया गया है।
पिछले साल भी झंबो वाली चौ में पानी आने से आसपास के इलाकों पातड़ां, खानेवाल, दुगाल में किसानों की फसलें तबाह हो गई थीं। लोगों के घरों में भी पानी घुस गया था। यही नहीं पटियाला की बड़ी नदी में भी पानी आने से समाना के कुछ इलाकों में फसलें बर्बाद हो गई थीं।
बरजिंदर पाल सिंह बराड़, एसई ड्रेनेज ने बताया कि आठ करोड़ से जिले की करीब 150 किलोमीटर लंबी सभी 10 ड्रेनें, बड़ी नदी व छोटी नदी की साफ-सफाई, घग्गर दरिया के बांधों की मरम्मत और झंबो वाली चौ के सभी 10 पुलों को ऊपर उठाया जा रहा है। साथ ही चौ की सफाई भी कराई जा रही है। चौ के सभी पुलों को तीन-तीन फुट ऊपर उठाया जा रहा है, ताकि पानी की निकासी सही ढंग से हो सके।
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