पंजाब में मतदान के लिए अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। एक जून को सभी मतदाताओं की किस्त ईवीएम में बंद हो जाएगी। काउंटडाउन शुरू होते ही सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने पंजाब में या तो डेरा जमा लिया है या रोजाना रैलियां कर रहे हैं।
सभी बड़े नेता जनता से सीधा संवाद करने के लिए उनके साथ लोकल कनेक्ट को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं और उन्हें अपने पक्ष में लाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। जैसे कि प्रधानमंत्री मोदी का पगड़ी पहनकर स्टेज पर आना और कहना कि मेरा पंजाब के साथ खून का नाता है और कांग्रेस की स्टार कैंपेनर प्रियंका गांधी का कहना कि मैं तो आधी पंजाबन हूं क्योंकि मेरा ससुराल पंजाब में है। इसी तरह आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का कहना कि केंद्र सरकार ने पंजाब को परेशान कर रखा है। संविधान बचाने के लिए फिर पंजाबियों को आगे आना होगा।
जनता के साथ सीधे संवाद कर उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश किसकी पूरी होगी, ये तो चार जून को सबके सामने आ जाएगा लेकिन जनता लोकल कनेक्ट को समझती है और उन बातों पर गौर भी करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीएम मोदी गुरदासपुर रैली में पगड़ी पहनकर नहीं पहुंचे तो वहां काफी हूटिंग हुई। इसके कुछ समय बाद जालंधर रैली में वे फिर पगड़ी में नजर आए थे। इसीलिए जो भी स्टार प्रचारक पंजाब आ रहा है, वह किसी भी तरह हो, पंजाब से खुद को कनेक्ट कर रहा है। सभी नेताओं की रणनीति लगभग एक जैसी ही है कि लोकल से जुड़ो और वोट मांगो।
इन दिनों प्रचार चरम पर है और दिग्गज नेता कहीं न कहीं रैलियां कर रही रहे हैं। केजरीवाल तो 5 दिन के लिए पंजाब में ही हैं। रोजाना रोडशो और रैलियां कर रहे हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने पंजाब में रह रहे उत्तराखंड के लोगों को साधने का प्रयास किया है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि पंजाब का मूड ही देश का मूड बनता है। इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह ने रैली में कहा था कि पंजाब की वजह से देश को सुरक्षित है। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री थरुर ने पंजाब के लिए ट्रेड कॉरिडोर खोलने की बात भी कही है।
पंजाब में कांग्रेस अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने का प्रयास कर रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब में सबसे अधिक 40.12 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 8 सीटें जीती थी। तब प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है। यही कारण है कि कांग्रेस की चुनौती भी बढ़ गई है, जिसके चलते ही राष्ट्रीय नेता लोगों से जुड़ने व मतदाताओं को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
2014 में 4 सीटें जीतने के बाद 2019 में आप 7.38 फीसदी वोटों के साथ केवल एक संसदीय सीट जीत पाई थी। अब समीकरण बदले हुए हैं। आम प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में है। वो संसदीय चुनावों में भी अपना प्रदर्शन सुधारना चाहती है इसी वजह से आप के नेता स्थानीय मुद्दों को उठाकर पार्टी के पक्ष में हवा बना रहे हैं। साथ ही सरकार द्वारा किए कामों को जनता के बीच लेकर जा रहे हैं। वहीं भाजपा दो दशकों बाद पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ रही है, जिसके चलते पार्टी के लिए चुनौतियां भी अधिक हैं। पिछली बार भाजपा ने 9.63 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थी। इस बार पार्टी अधिक सीटों पर दांव लगा रही है, जिसके चलते पार्टी के राष्ट्रीय नेता पंजाब के कोने-कोने तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए बात कर रहे हैं।
इसी तरह शिरोमणि अकाली दल ने पिछली बार लोकसभा चुनाव में 27.45 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 2 सीटें जीती थी। वोट शेयर के हिसाब से तो शिअद दूसरे नंबर पर रहा था। इसके बावजूद पार्टी के हाथ ज्यादा सीट नहीं लगी। यही कारण है कि शिअद अपने इस प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थी और वर्ष 2022 विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन से पार्टी को और भी झटका लगा। यही वजह है कि इस बार शिअद पंथक मुद्दों के साथ चुनाव मैदानी में उतरी है और दोबारा से प्रदेश में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी हुई है। पार्टी लोकसभा चुनाव को एक तरह से सेमीफाइनल मान कर चल रही है और इसी से फाइनल विधानसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन की स्थिति साफ हो पाएगी।
किस नेता ने कैसे जोड़ा पंजाब से रिश्ता
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-मेरा पंजाब से खून का नाता है।
- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी- पंजाब मेरा ससुराल है। मेरी शादी ठेठ पंजाबी परिवार में हुई है। मैं आधी पंजाबन हूं।
- राहुल गांधी-पंजाब का मूड ही देश का मूड बनता है।
- अरविंद केजरीवाल -आज देश का संविधान और लोकतंत्र खतरे में है। इसे बचाने को पंजाबियों को फिर आगे आना होगा।
- पुष्कर धामी- उत्तराखंड से सिख गुरुओं का कितना जुड़ाव था, इसका पता हेमकुंठ साहिब से लग जाएगा।