पंजाब चुनाव प्रचार अपने समापन पर है, वहीं प्रचार करते करते नेताओं के सुर बिगड़ गए और उनमें एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लग गई। इसकी शुरुआत तो जनता की समस्याओं, प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक विकास के मुद्दों को लेकर हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे मतदान का दिन करीब आता गया, सभी राजनीतिक दल ‘हर हाल’ में जीत हासिल करने की पैंतरेबाजी पर उतर आए।
इस मामले में चाहे किसी भी दल का नेता हो, विरोधी पक्ष के नेताओं का चरित्र हनन करने से भी गुरेज नहीं कर रहे। तीन दिन पहले शिअद नेता शेर सिंह घुबाया का एमएमएस जारी हो गया तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेश से वयोवृद्ध नेता व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के लिए यहां तक कह दिया कि यह तो मरने वाले हैं।
सुखबीर बादल जहां आम आदमी पार्टी को आतंकियों से साठगांठ करने की बात कह रहे हैं, वहीं शिअद की ओर से कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी सत्ता में आई तो पंजाब में गृह युद्ध छिड़ जाएगा। वहीं, आम आदमी पार्टी भी पीछे नहीं है। पार्टी बादल सरकार को ड्रग माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, केबल माफिया जैसे नाम दे रही है।
बिगड़े सुर कहां जाकर शांत होंगे, यह कहना मुश्किल है
पंजाब में राहुल गांधी
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सत्ता प्राप्ति के लिए राजनेताओं के बिगड़े सुर कहां जाकर शांत होंगे, यह कहना मुश्किल है क्योंकि सभी दल राजनीतिक बयानबाजी के पतन के लिए दूसरे दल हो ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस संबंध में जब राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा की गई तो वे इस पर ज्यादा गंभीर दिखाई नहीं दिए। उनके जवाब कुछ ऐसे रहे कि पहल तो उन्होंने की है, उन्हें ही समझना चाहिए।
पंजाब के मौजूदा चुनाव प्रचार की स्थिति पर नजर डालें तो सभी दलों ने अपने-अपने मैनिफेस्टो जारी करते हुए जनता को सुविधाएं मुहैया कराने और प्रदेश के विकास से वादे किए हैं। इन मैनिफेस्टो पर लंबे समय तक चर्चा होती, ऐसा नहीं हुआ। बल्कि हर मैनिफेस्टो पर चर्चा जारी करने वाले दिन तक ही सीमित रही और अगले दिन फिर से नेताओं ने एक-दूसरे पर अभद्र शब्द बाणों के वार शुरू कर दिए।
दरअसल, बयानों में अभद्र शब्दावली की शुरुआत उसी समय हो गई थी, जब आम आदमी पार्टी ने प्रदेश में चुनाव के इरादे से कदम रखते हुए बादल सरकार के मंत्री पर नशा तस्करी के खुले आरोप लगाए।
आप की अपनी दलीलें और अपने बयानों पर डटी है
अमृतसर के मजीठा में केजरीवाल की रैली
इस संबंध में आप की अपनी दलीलें हैं और पार्टी आज भी अपने बयानों पर डटी है, लेकिन आप के जवाब में शिअद ने मोर्चा खोला तो अरविंद केजरीवाल जोकि दिल्ली के मुख्यमंत्री भी हैं, के बारे में जितनी भी अभद्र भाषा का उपयोग हो सकता था, किया गया। दोनों दलों का शब्द द्वंद्व जारी ही था कि आप ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के बादल से पारिवारिक संबंधों का मुद्दा उठाते हुए उन पर पंजाबियों को धोखा देने का आरोप लगा दिया।
नतीजतन, आप-शिअद की जंग में कांग्रेस भी कूद गई और पंजाब की जनता पीछे छूट गई। चुनावी सभाओं, रोड रैलियों में सभी पक्ष मतदाताओं को यह समझाने में जुटे हैं कि विरोधी पक्ष कितना भ्रष्ट, कितना बड़ा चोर, कितना बड़ा अपराधी, वगैरह-वगैरह है।
चुनाव प्रचार के बाकी बचे दो दिन में भी ऐसी कोई उम्मीद नहीं है कि पार्टियां जनता से सामने अपनी बात रखेंगी। हर नेता इसी कोशिश में है कि अपनी चुनावी सभा में वह विरोधी पक्ष को कितना अधिक बुरा साबित कर सकता है।