मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा 10 बार समय देकर भी नहीं मिलने से भड़के प्रदेश भर के अध्यापकों ने रविवार को सीएम के मोती महल की तरफ रोष मार्च निकाला। अध्यापकों को रोकने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें मारीं और लाठीचार्ज किया। इस दौरान 40 अध्यापक और 10 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। कई अध्यापिकाओं ने पुलिस पर बदसलूकी के भी आरोप लगाए हैं।
रेगुलर करने की मांग को लेकर रोष मार्च निकाल रहे अध्यापकों को पुलिस ने पहले फव्वारा चौक पर बैरीकेड लगाकर रोका। अध्यापक नहीं माने। थोड़ी बहुत धक्कामुक्की के बाद अध्यापकों का काफिला आगे बढ़ गया। जैसे ही अध्यापक पोलो ग्राउंड के नजदीक बुड्डा दल स्कूल की जूनियर ब्रांच के नजदीक पहुंचे, उन्हें वहां बड़ी संख्या में तैनात पुलिस फोर्स ने बैरीकेड लगाकर रोक लिया। अध्यापकों ने बैरीकेडिंग को तोड़ आगे बढ़ना चाहा तो दोनों तरफ से धक्कामुक्की शुरू हो गई। अध्यापकों के न मानने पर पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया और पानी की बौछारें मारनी भी शुरू कर दीं।
महिला शिक्षकों के साथ की बदसलूकी : गगन राणू
अध्यापक नेता गगन राणू ने दावा किया कि प्रदेश भर से 20 हजार शिक्षकों ने इस रोष मार्च में हिस्सा लिया। चालीस के करीब शिक्षकों पुलिस लाठीचार्ज के दौरान जख्मी हुए हैं। किसी अध्यापक की टांग में तो किसी के हाथों में चोटें लगी हैं। वहीं उनके साथी भूपिंदर सिंह के सिर में गंभीर चोट लगी है। उन्हें सिटी स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया पुलिस ने कई महिला शिक्षकों के साथ भी बदसलूकी की हैं। उन्हें घसीटा गया और दुर्व्यवहार किया गया। कड़ाके की ठंड में पानी की बौछारों की बीच लाठियां खाकर भी अध्यापक डटे थे। वहीं रात को मौके पर डीसी व एसएसपी पहुंचे और आंदोलनकारी अध्यापकों से बात की।