एक दिसंबर 2018 को चंडीगढ़ के 13 गांव नगर निगम में शामिल हुए थे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत और जुमला मुश्तरका भूमि नगर निगम के नाम हो गईं थीं लेकिन चार साल बीतने के बाद भी अब तक शामलात की जमीनें निगम को नहीं सौंपी गईं हैं। इसके लिए नगर निगम कई बार पत्र लिख चुका है लेकिन हर बार एक अधिसूचना जारी होने की बात कही जाती है। अधिसूचना कौन जारी करेगा, यह किसी को नहीं पता। अब मामला प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के पास पहुंचा है।
अधिसूचना नहीं होने से गांव की शामलात जमीनों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं और नगर निगम व प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहे। अधिकारियों का मानना है कि जब दिसंबर 2018 की अधिसूचना के अनुसार गांवों के सभी क्षेत्र नगर निगम की हद में आ गए तो शामलात की जमीनें भी नगर निगम के नाम होनी चाहिए थीं लेकिन राजस्व विभाग इस बात को नहीं मान रहा और ‘एब्सेंस ऑफ नोटिफिकेशन’ की बात कहकर मामला टाल रहा है।
नगर निगम ने विभाग से ये भी पूछा कि अधिसूचना किसे जारी करनी है, इस पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। कुछ दिन पहले ये मामला प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल तक भी पहुंचा। उन्हें बताया गया कि राजस्व विभाग शामलात जमीनों को नगर निगम के नाम करने के लिए अलग से अधिसूचना की बात कह रहा है। इस पर उन्होंने निगम और राजस्व विभाग को मामले को बारीकी से देखने को कहा और स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कानूनी राय लेने की सलाह दी।
ग्राम पंचायत की 67.57 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा
सिर्फ शामलात ही नहीं ग्राम पंचायत की जमीनों पर भी काफी कब्जे हो चुके हैं। कुछ महीने पहले जब निगम ने 25 गांवों में सर्वे कराया तो पता चला कि ग्राम पंचायत के पास 138.84 एकड़ भूमि है जिसमें से 67.57 एकड़ भूमि पर लोगों के स्थायी कब्जे हैं। निगम ने एस्टेट विभाग और पुलिस के सहयोग से कुछ जगह से अस्थायी कब्जे हटाकर तार से बाड़बंदी भी कर दी है। सर्वे में पाया गया कि सबसे ज्यादा कब्जा हल्लोमाजरा में है। यहां ग्राम पंचायत की 24.21 एकड़ भूमि है। इसमें से 2.95 एकड़ भूमि सरकारी कार्यों के लिए उपयोग हो रही है। वहीं 4.16 एकड़ भूमि खाली और करीब 17.09 एकड़ भूमि पर लोगों का पक्का कब्जा है।
ये होती हैं शामलात और जुमला मुश्तरका मालिकान जमीन
शामलात भूमि : यह गांव की वह जमीन होती है जिसका स्वामित्व गांव की पंचायत के पास होता है। इन पर सिर्फ डिस्पेंसरी, स्कूल आदि ही बन सकते हैं।
जुमला मुश्तरका भूमि : यह भूमि ग्रामीणों द्वारा व्यक्तिगत रूप से दान की हुई जनसामान्य भूमि होती है, जिसका प्रबंधन पंचायत के हाथों में होता है।
शामलात की भूमि को लेकर हमने अधिसूचना तैयार कर ली है। इसे अगले सप्ताह सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को भेज देंगे। उनकी ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद हम शामलात की भूमि पर भी कब्जा लेना शुरू कर देंगे।
- आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम