गर्मी और कड़कती धूप में सिटी की ट्रैफिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तैनात लेडी कांस्टेबल को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इन्हें सुबह आठ बजे से लेकर रात के आठ बजे तक ड्यूटी देनी पड़ती है।
सोमवार को तेज धूप में भी लेडी कांस्टेबल हर प्वांइट पर ड्यूटी दे रही थीं। नाम न बताने की शर्त पर सभी ने एक ही बात कही कि ड्यूटी में बेशक लेडी कांस्टेबल्स के तौर पर तैनात हैं, लेकिन हैं तो लड़कियां ही न।
उन्होंने कहा कि गर्मी में बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया नहीं करवाई जा रही हैं। इतना ही नहीं लेडी वॉश रूम तो दूर पानी के लिए भी कई बार तरसना पड़ रहा है।
ट्रैफिक अधिकारी को बताने में उन्हें डर लगता है, क्योंकि बताने से सुनवाई की बजाए उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। अधिकतर लेडी कांस्टेबल ने बताया कि वे अपने स्कूटर में क्रीम व लोशन तो रखती हैं, लेकिन लगाने का समय नहीं मिलता है।
शहर के हर प्वाइंट पर एक हेड कांस्टेबल, एक कांस्टेबल और एक लेडी कांस्टेबल तैनात है, जो एक शिफ्ट में ड्यूटी दे रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस में महिला कांस्टेबल एक शिफ्ट यानि सुबह आठ से लेकर रात आठ बजे या सुबह 6.45 से लेकर 4 बजे तक ड्यूटी दे रही हैं। इन्हें शिफ्ट की सुविधा नहीं दी गई है।
कई बार नहीं मिलता है साथी कांस्टेबल से सहयोग
कुछ लेडी कांस्टेबल ने कहा कि उन्हें अपने सहयोगी साथी कांस्टेबल से भी सहयोग नहीं मिल पाता है, तो र्कई कांस्टेबल ने साथी कांस्टेबल के सहयोग की बात भी मानी। ड्यूटी के दौरान लेडी कांस्टेबल को चेहरे को कवर करने के लिए मास्क के प्रयोग और सनग्लास पहने से भी सख्त मना है।
ये हैं इनकी समस्याएं...
- धूप में चेहरा कवर करने की छूट नहीं
- ड्यूटी पर रहना पड़ता है खड़े
- लंच टाइम न मिलना
- पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं