एजुकेशन हब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने लंबे समय से काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों को डीसी रेट देने का आश्वासन देकर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ले लिया।
इसका खुलासा आउटसोर्सिंग कर्मियों का समर्थन करने वाले आरटीआई एक्टीविस्ट नवीन कुमार और प्रदर्शनकारियों ने किया। इनका आरोप है कि बिना डीसी रेट के आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) नहीं दिया सकता।
लेकिन केयू के पास यह प्रमाण पत्र है। जबकि अभी तक आउट्रसोर्सिंग कर्मियों को डीसी रेट नहीं मिला। हालांकि लेबर कमिश्नर की ओर से डीसी रेट देने के निर्देश भी जारी हो चुके हैं।
नवीन कुमार के अनुसार 27 अगस्त 2013 को तत्कालीन डिप्टी लेबर कमिश्नर कर्मपाल सिरोही ने उनका समझौता केयू अधिकारियों से कराया था।
नवीन ने बताया कि आरसी प्राप्त करने के लिए शर्त है कि ठेके पर लगे कर्मियों को डीसी रेट दिया जाए। अन्यथा यह प्रमाण पत्र नहीं मिल सकता। बावजूद इसके केयू ने फर्जी तरीके से आरसी प्राप्त कर ली।
लेकिन कर्मचारियों को डीसी रेट नहीं दिया। वहीं अब कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाने की बात कही जा रही है। इन्हें रखने या काम से निकालने की जिम्मेदारी केयू प्रशासन ने नए ठेकेदारों पर छोड़ दी है।
काबिलेजिक्र है कि 2006 से 2014 तक केयू ने ठेकेदार तो बदल दिए, लेकिन कर्मी नहीं बदले। जब इन कर्मियों को बदला नहीं गया, तो फिर इसकी अवश्यकता क्यों पड़ी।
कर्मचारी नेता मदन लाल ने बताया कि नियमानुसार ठेकेदार बदला जा सकता है लेकिन कर्मी नहीं। पहले कर्मी न बदले जाने के पीछे यही कारण रहा हो लेकिन अब ऐसा क्यों हो रहा है यह कर्मियों की समझ से परे हैं।
वहीं आउटसोर्सिंग कर्मियों के समर्थन में इनसो कार्यकर्ताओं के साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों को समर्थन दिया।
आउटसोर्सिंग चलाने के लिए जरूरी है आरसी
किसी भी यूनिवर्सिटी को आउटसोर्सिंग के काम के लिए आरसी करवानी होती है। श्रम विभाग से जारी होनी वाला रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट इस बात को प्रमाणित करता है कि यूनिवर्सिटी आउट सोर्स वाले काम के लिए कर्मी रख सकते हैं।
इसके बिना यूनिवर्सिटी आउटसोर्सिंग के काम नहीं करवा सकती है। मामले में कई संस्थाएं कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी को घेरने की तैयारी कर रहीं हैं। बताया जाता है कि इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों का शोषण होने पर श्रम विभाग चुपचाप बैठा रहा।
मामले में श्रम विभाग के अधिकारी भी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं। केयू पर तो कार्रवाई तय मानी जा रही है। कर्मचारी कोर्ट जाते हैं तो अधिकारियों की नींद उड़नी तय है।
साढे़ तीन सौ कर्मियों को ही मिला डीसी रेट
आरटीआई एक्टिविस्ट नवीन कुमार ने बताया कि केयू में काम कर रहे सिर्फ 350 कर्मियों (आउटसोर्सिंग) को ही डीसी रेट दिया गया। वह भी उन्हें शुरू से ही मिलना शुरू हुआ था।
जबकि आउटसोर्सिंग कर्मियों की संख्या 1400 से अधिक हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल साढे़ तीन सौ कर्मियों को ही डीसी रेट क्यों दिया गया, इससे साफ पता चलता है कि केयू में कहीं न कहीं कुछ तो फर्जीवाड़ा हो रहा है।
लेबर कमीशभनर ने डीसी रेट देने के आदेश किए थे जारी
साल 2013 में तत्कालीन लेबर कमिश्नर ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी आउटसोर्सिंग कर्मियों को डीसी रेट पर वेतन देने के आदेश जारी किए थे।
यह आदेश 14 अगस्त 2013 को जारी हुए पत्र क्रमांक नंबर-25763 के जरिये डीसी को दिए थे। लेकिन इन आदेशों पर अमल नहीं हुआ और कर्मियों को डीसी रेट नहीं मिला।
पहले इनके पास था ठेका
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आउटसोर्सिंग कर्मी लगाने का ठेका पहले आरबी इंटर प्राइजेज फरीदाबाद, ईएक्सएएम चंडीगढ़ और केशव सिक्योरिटी दिल्ली के पास था। इन तीनों फर्मों के जरिये केयू में आउटसोर्सिंग कर्मी काम कर रहे थे।
अब इन्हें मिला कान्ट्रेक्ट
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने अब जिन फर्मों को कान्ट्रेक्ट दिया गया है, उनमें टी नाइन ह्यूमन रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली तथा पंकज सर्विस सिक्योरिटी राजापुरी उत्तम नगर नई दिल्ली शामिल हैं।
कुछ कर्मी कर रहे हैं अपनी इच्छा से कार्य
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब पांच दर्जन से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मी अपनी इच्छा से विभिन्न ब्रांचों में काम कर रहे हैं।
बताया गया है कि रिजल्ट ब्रांच, सीकरेसी, कंडक्ट ब्रांच और पुनर्मूल्यांकन शाखा, प्रशासनिक भवन, स्थापना शाखा में कर्मी काम कर रहे हैं।
प्लानिंग सेक्शन में भी कुछ महिला कर्मी काम पर हैं। जबकि केयू प्रशासन ने इन्हें कार्य करने से मना कर दिया है। अब ऐसे में कुछ बवाल हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
बहरहाल इस बारे में रजिष्ट्रार डॉ. केसी रल्हाण को शिकायत देते हुए मुख्य सुरक्षा शाखा में भी इसकी कॉपी दे दी गई है।
15वें दिन भी रहा धरना जारी
केयू में धरना दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मियों ने 15वें दिन भी प्रदर्शन कर नारेबाजी की। कुलपति व कुलसचिव के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने भड़ास निकाली।
शुक्रवार को धरने के दौरान भी कुलपति कार्यालय के बाहर पुलिस कर्मी मौजूद रहे। वहां तैनात पुलिसकर्मियों में महिला पुलिस भी शामिल रही, जबकि वीसी कार्यालय का कैंची गेट बंद रखा गया।
राष्ट्रीय आयोग के सदस्य भी मिले कर्मियों से
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग सदस्य गोपाल कृष्ण साहौत्रा भी मिले प्रदर्शनकारी कर्मियों से मिले। उन्होंन कुलसचिव डॉ. केसी रल्हाण से मुलाकात कर आउटसोर्सिंग के तहत लगे सफाई कर्मियों को काम पर वापस लेने और डीसी रेट देने के बारे में बातचीत की। बताया गया है कि कुलसचिव ने साहौत्रा को इस पर अमल करने का आश्वासन दिया है।