भारतीय मूल की कनाडाई लेखिका कुलदीप कौर आजकल चंडीगढ़ के दौरे पर हैं। यहां उन्होंने युवा पीढ़ी पर खुलकर बात की। रण भूमि में युद्ध सा लगता है लड़की का जन्म,जब मर्यादा की किताब पर संस्कारो का पाठ पढ़ाया जाता है..ऐसे बैठो, ऐसे रखो...खाओ,कम खाओ,...........शीर्षक उत्सव मनाओं की कुछ इन्ही पंक्तियों को सुनाया कुलदीप ने। वह शुक्रवार को शहर में थी। इस दौरान उन्होंने अपनी पुस्तकों के बारे में चर्चा तो की ही इसके साथ ही अपनी लिखी कुछ कविताएं भी सुनाई।
कुलदीप कौर जोकि सिटी की रहनी वाली है लेकिन 2002 के बाद कनाडा चली गई। अब वह वहीं की निवासी हैं। कुलदीप कौर पंजाबी, हिंदी, अंग्रेजी की लेखक और कवि, टीवी एंकर है। इसके साथ ही सोलश वर्कर भी हैं। कुलदीप पिछले 14 साल से कनाडा में है। इसके बावजूद भी वह भारतीय कल्चर से जुड़ी हुई है। उन्होंने अब तक कई पुस्तकें लिखी है जो कल्चर,सोशल लाइफ़,हयूमन बिहेव पर है।
सेमीनार में हिस्सा लेने पहुंची भारत
कुलदीप कौर इसी महीने दिल्ली में हुए वुमन इकोनोमिक फोरम सेमीनार में हिस्सा लेने पहुँची। इन्हें विशेष रुप से स्पीकर की भूमिका केलिए बुलाया गया था। यहां पर उन्होंने तीन विषय पर लेक्चर भी दिया। इस सेमीनार में 110 देशो ने हिस्सा लिया।
कनाडा में होगा पुस्तक का विमोचन
कुलदीप कौर ने 2006 में अपनी पहली पुस्तक अंधेरे समय। इसके बाद उन्होंने हाल ही में अंग्रेजी में एक कविताओं की पुस्तक लिखी है। जिसका नाम अनब्रेक एबल सोल रखा गया है। जो सोशल लाइफ़ सेजुड़ी है। यह पुस्तक लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही कनाडा में रिलीज होने जा रही हैं।
कल्चर मनाया जाता है, लेकिन नई युवा पीढ़ी नही देती ध्यान
कुलदीप कौर ने बताया कि जैसे भारत में हर कल्चर पर कार्यक्रम होते है वैसे ही कनाडा में भी हर हप्ते कल्चर से जुड़ी गतिविधयां होती है। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा में युवा पिढ़ी अपने कल्चर से हुई बातों पर ध्यान नही देती।
साउथ एशिया अवार्ड में हिस्सा लिया
कुलदीप कौर ने बताया दो साल पहले मिसेज साउथ एशिया कनाडा प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें हिस्सा लेते हुए मैने पांचवा स्थान पाया।
लॉ एंड आर्डर बेहतर, अकेलापन दुखदाई
कानाडा केबारे में जब कुलदीप से एक अच्छी और एक बुरी बात पूछी गई तो उन्होंने पहले अच्छी बात बताई कि वहां का लॉ एंड आर्डर बेहतरीन है। वहीं बुरी बात के बारे में उन्होंने कहा कि वहां रहने वाली औरतो और बर्जुर्गों का अकेलापन बहुत दुखदाई हैं।