18 मार्च की रात वह लुधियाना पहुंचा और शेखपुरा गुरुद्वारे में कुछ देर रुकने के बाद वहां से एक स्कूटी पर रात करीब 9:30 बजे निकल गया। उस समय पपलप्रीत उसके साथ था। 20 मार्च को अमृतपाल कुरुक्षेत्र में एक महिला के घर पहुंचा, जो पपलप्रीत की जानकार थी और उसके कहने पर ही महिला ने अमृतपाल को शरण दी। बाद में इस महिला को हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
वह बार-बार अपनी लोकेशन बदलता रहा। उसे पटियाला और कई अन्य स्थानों पर भी देखा गया। कई बार पुलिस उसके करीब पहुंची लेकिन वह बच निकलने में कामयाब रहा। उसे तलाश कर रही पुलिस ने एक बार अमृतपाल को मर्सिडीज कार में भागते देखा। एक बार उसे अपने चार समर्थकों के साथ मोटरसाइकिलों पर भागते देखा गया। अमृतपाल के काफिले को एक पुलिस चेक प्वाइंट पर भी रोका गया लेकिन वह भाग निकलने में सफल रहा।
पुलिस का कहना है कि अमृतपाल ने पीलीभीत, सपरोड, साहनेवाल और नदलोल स्थित गुरुद्वारों में भी शरण ली। उसकी तलाश में पंजाब पुलिस ने पंजाब के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल से सटे इलाकों में अभियान चलाया लेकिन सफलता नहीं मिली।
पपलप्रीत की गिरफ्तारी के बाद अमृतपाल के पास छिपने का कोई ठिकाना नहीं रहा और उस तक आर्थिक मदद पहुंचनी भी बंद हो गई। 29 मार्च को उसने एक वीडियो जारी कर आत्मसमर्पण का इरादा जाहिर किया लेकिन यह काम भी वह किसी हीरो की तरह करना चाहता था। अमृतपाल ने इसके लिए श्री अकाल तख्त के जत्थेदार से सरबत खालसा बुलाने की मांग की लेकिन सफलता नहीं मिली। तब पुलिस ने मान लिया कि अमृतपाल बैसाखी पर 14 अप्रैल को किसी बड़े गुरुद्वारे में संगत के सामने आत्मसमर्पण करने की तैयारी कर रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बठिंडा में तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब समेत राज्य के सभी प्रमुख गुरुद्वारों पर निगरानी शुरू की तो अमृतपाल 22 अप्रैल की रात गांव रोडे पहुंचा, जहां रविवार सुबह पुलिस ने उसे पकड़ लिया।