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आदमपुर उपचुनाव: अग्निपरीक्षा में हुड्डा फेल, अंतर्कलह से नहीं उबर सकी पार्टी, पढ़ें- हार के मुख्य कारण

Sun, 06 Nov 2022 09:48 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कांग्रेस पार्टी ने अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर भूपेंद्र हुड्डा को प्रदेश की कमान दी थी, जिसका दोहरा नुकसान झेलना पड़ा। पहले तो कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए, जिससे एक विधायक कम हुआ। उसके बाद अब आदमपुर सीट पर भी हार झेलनी पड़ी।
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कुलदीप बिश्नोई और भूपेंद्र सिंह हुड्डा। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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आदमपुर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की हार के कई कारण रहे। फ्री हैंड मिलने के बाद उपचुनाव की पहली अग्निपरीक्षा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पास नहीं हो सके। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा, विधायक किरण चौधरी, पूर्व डिप्टी सीएम एवं भव्य के ताया चंद्रमोहन बिश्नोई की आदमपुर से दूरी कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हुई। कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश जेपी की हार का सबसे बड़ा कारण पार्टी की अंतर्कलह भी रही। कांग्रेस दिग्गज यहां एक मंच पर नहीं आ पाए, जिसका जनता में गलत संदेश गया। 

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भाजपा उम्मीदवार भव्य बिश्नोई तो दादा भजनलाल की विरासत के सहारे सीट निकाल ले गए लेकिन जेपी को हुड्डा पिता-पुत्र जितवा नहीं पाए। यहां कांग्रेस जींद की राह ही चली थी। जींद उपचुनाव में पार्टी ने रणदीप सुरजेवाला को कैथल से लाकर प्रत्याशी बनाया था, जिससे पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। आदमपुर में जेपी को कलायत से लाकर मैदान में उतारा, जिसका भी राजनीतिक तौर पर नुकसान हुआ। टिकट की दौड़ में शामिल स्थानीय नेताओं ने जेपी के पक्ष में मतदान करवाया ही नहीं। सैलजा, किरण और चंद्रमोहन से जुड़े नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भी खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी के साथ खड़े नहीं हुए।

जेपी बेशक 15 हजार मतों से ही हारे हों पर गुटबाजी की वजह से कांग्रेस पूरी तरह से भजनलाल परिवार के गढ़ में सेंध नहीं लगा पाई। इसके पीछे एक कारण यह भी रहा कि यहां कांग्रेस का असली कैडर कभी तैयार ही नहीं हुआ। भजनलाल परिवार के राजनीतिक आधार पर ही यहां कांग्रेस जीतती रही। जब-जब भजनलाल परिवार कांग्रेस से जुदा हुआ, पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा। हुड्डा अपने बूते भले ही जेपी को 52 हजार से अधिक वोट दिलाने में सफल रहे हों लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव को लेकर उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी। पांच धड़ों में बंटी कांग्रेस की आगे ही राह भी आसान नहीं रहने वाली है।
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कांग्रेस को झेलना पड़ा दोहरा नुकसान 
कांग्रेस पार्टी ने अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ही उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर भूपेंद्र हुड्डा को प्रदेश की कमान दी थी, जिसका दोहरा नुकसान झेलना पड़ा। पहले तो कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए, जिससे एक विधायक कम हुआ। उसके बाद अब आदमपुर सीट पर भी हार झेलनी पड़ी। भजनलाल के दिए 22 हजार रोजगार और मुख्यमंत्री रहते करवाया गया विकास भव्य की जीत का मजबूत आधार बना। 

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