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Promise Day: कोई स्वादिष्ट खाने का तो कोई खेल जारी रखने का निभा रहा वायदा... पढ़ें ऐसे जोड़ों की कहानी

Tue, 11 Feb 2025 09:20 AM IST
निवेदिता वर्मा संजीव पंगोत्रा, संवाद, चंडीगढ़

सार

विवाह से पहले और अब कई वर्षों बाद भी उनका प्यार पूरी तरह से पहली की तरह बरकरार है। जैसे प्रेमी के तौर पर एक दूसरे का आदर किया करते थे, वैसे ही यह लोग एक दूसरे का सम्मान कर सम्मान करते हुए परिवार को हंसी खुशी चला रहे हैं।
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प्राॅमिस डे पर जोड़ों की कहानी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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वेलेंटाइन वीक पर आज हम आपको प्रॉमिस डे पर खेल से जुड़े ऐसे जोड़ों के बारे में बताने जा रहे है, जिन्होंने न केवल अपने प्रेम का परवान चढ़ाया। बल्कि दिए हुए प्रॉमिस को आज तक दिलो जहां से निभा रहे हैं। 

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इन जोड़ों की लव मैरिज हुई, पहले नजरें मिली, फिर एक दूसरे का जाना और इसके बाद विवाह के बंधन में बंध गए। विवाह से पहले और अब कई वर्षों बाद भी उनका प्यार पूरी तरह से पहली की तरह बरकरार है। जैसे प्रेमी के तौर पर एक दूसरे का आदर किया करते थे, वैसे ही यह लोग एक दूसरे का सम्मान कर सम्मान करते हुए परिवार को हंसी खुशी चला रहे हैं।

हैंडबॉल कोर्ट से हुई शुरुआत

सचिन और स्नेहलता हैंडबॉल के खेल के खिलाड़ी हैं। एक दिन दोनों हैंडबॉल के कोर्ट पर मिले। एक दूसरे से नजरें मिली और खेल खेल के जरिए एक दूसरे को अपना दिल दे बैठे। सचिन ने बताया कि शादी से पहले उन्होंने एक दूसरे को प्रॉमिस किया था, कि वह अपने जीवन में हैंडबॉल के खेल को जारी रखेंगे और इस खेल से युवा प्रतिभाएं खोजने का काम करते रहेंगे। दोनों इंटरनेशनल स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी रहे हैं और कोच के तौर पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। सचिन रेलवे में काम करते है और राष्ट्रीय हैंडबॉल टीम के साथ रहते हैं। वहीं उनकी पत्नी खिलाड़ियों को कोचिंग देती हैं।

मुसीबत के समय में भी प्रॉमिस निभाया

वॉलीबॉल के खेल में अपने करियर की शुरुआत करने वाली वंदना ने बताया कि उनकी लव मैरिज अभिनीश चौहान से आज से 11 वर्ष पहले हुई थी। दोनों चंडीगढ़ के रहने वाले है, वंदना सेक्टर 42 स्थित यूटी खेल विभाग में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में वालीवाल की कोच रही हैं। नौ वर्ष के बाद पंजाब खेल विभाग को ज्वाइन किया। अब मौजूदा समय में शहीद भगत सिंह नगर नवांशहर में डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स ऑफिसर के तौर पर काम कर रही है। वंदना ने बताया शादी से पहले हम दोनों ने प्रॉमिस किया था कि जिंदगी में चाहे जो कुछ भी हो जाए, हम एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। वंदना ने बताया कि एक वक्त ऐसा भी आया जब ऑफिस जाते समय मेरा एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें मेरी हेड इंजरी हो गई थी, मेरे पति ने मेरी काफी सेवा की। थोड़ा ठीक होने के बाद मुझे रोजाना ऑफिस लाना और छोड़ते थे, इसके लिए उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी। मेरी जिंदगी में बुरे पल में अपना प्रॉमिस निभाया और आज तक निभा रहे हैं।
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दिल का रास्ता पेट से होकर जाता है

यह बात फिट बैठती है खुशहाल सिंह और उनके पत्नी धमेंद्र कौर पर। इन दोनों की पहचान उस समय से हुई थी कि जब दोनों कॉलेज में पढ़ाई करते थे, इसके बाद दोनों बीपीएड का कोर्स करने लगे। यह बात वर्ष 2013 की है, खुशहाल को खाने का काफी का शौक था। यह बात धर्मेंद्र कौर को एक साथ खाना खाने के दौरान पता लगी। दोनों में नजदीकी बढ़ी और एक दूसरे के साथ प्रेम के बाद शादी के बंधन में बंध गए। पत्नी धर्मेंद्र कौर ने शादी से पहले प्रॉमिस किया था कि वह शादी के बाद पति को स्वादिष्ट पकवान बनाकर खिलाएगी।

खुशहाल सिंह को कढ़ाई पनीर, वेजिटेबल चीला, आलू और गोभी के पराठे पसंद है। पत्नी शादी से पहले दिए प्रॉमिस को स्वादिष्ट पकवानों के जरिए पति को परोस रही है। खुशहाल सिंह डीएवी स्कूल सेक्टर 7 में फिजिकल टीचर है औ उनकी पत्नी धर्मेंद्र कौर सेक्टर 31 एयरफोर्स स्टेशन के स्कूल में फिजिकल की टीचर है।
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