चुनाव में आप की धमाकेदार एंट्री से भाजपा के कई दिग्गज नेता अपनी सीट तक नहीं बचा सके। भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता और उनके परिजन चुनाव हार गए। वहीं पूर्व मेयर व भाजपा प्रत्याशी देवेश मोदगिल आप प्रत्याशी जसबीर सिंह से 939 मतों से हार गए। पूर्व मेयर राजेश कालिया भी दौड़ में नहीं टिके और कांग्रेस और आप की टक्कर में तीसरे नंबर पर चले गए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के वार्ड से खड़े विजय कौशल राणा आप प्रत्याशी योगेश ढींगरा से हार गए, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला के बेटे सुमित चावला भाजपा प्रत्याशी कुलजीत सिंह संधू से 255 वोट से हार गए। हालांकि शिरोमणि अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष व प्रत्याशी हरदीप सिंह अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।
पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू महज 11 वोटों से जीते
वर्तमान पार्षदों में सीनियर डिप्टी मेयर व भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू महज 11 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी एसएच लकी से जीते, वहीं भाजपा पार्षद दिलीप शर्मा भी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला की पत्नी हरप्रीत कौर बबला भी चुनाव जीत गईं। कांग्रेस पार्षद गुरबक्श रावत भी फिर से पार्षद चुनी गईं। वहीं, भाजपा पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली, भरत कुमार, हीरा नेगी, सुनीता धवन अपनी सीट हार गए। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ और रविंदर कौर गुजराल को भी हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली तीसरे नंबर पर रहे। उनके वार्ड से अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह ने कांग्रेस के अतेंद्र सिंह रौबी को 2145 मतों से हराया। भरत कुमार आप प्रत्याशी लखबीर सिंह से 1062 मतों से हार गए। वहीं हीरा नेगी आप प्रत्याशी अंजू कात्याल से 76 मतों से हार गईं। सुनीता धवन आप प्रत्याशी तरुणा मेहता से 1516 मतों से हार गईं। कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ तो अपने वार्ड में तीसरे नंबर पर रहे, वहीं रविंदर कौर गुजराल आप प्रत्याशी प्रेमलता से 681 मतों से हार गईं।
आप के जीत के पांच मुख्य कारण
आम आदमी पार्टी ने कृषि कानून बिलों के मुद्दे को खूब भुनाया। जिसका उदाहरण दमनप्रीत बादल है। किसानों के समर्थन में लगातार रैलियां कीं, वहीं भाजपा के कार्यक्रमों का डटकर विरोध किया। इसका फायदा आप को मिला।
नए और युवा चेहरों को दिया मौका
आप ने नए और युवा चेहरों को मौका दिया। वहीं महिलाओं को भी मैदान में उतारा। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी आप ने अपने साथ जोड़ा। इसका असर यह हुआ कि सेक्टरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों और कालोनियों के लोगों का भरपूर समर्थन मिला।
दिल्ली की व्यवस्था से लोगों को किया आकर्षित
आप प्रत्याशियों ने पूरा चुनाव दिल्ली मॉडल पर लड़ा। दिल्ली की तर्ज पर निशुल्क पानी, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा का वादा किया। मोहल्ला क्लीनिक और वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली सुविधाओं ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया।
स्टार प्रचारक नहीं, अपने चेहरों पर लड़ा चुनाव
भाजपा और कांग्रेस के पास विभिन्न राज्यों के स्टार प्रचारक थे लेकिन आप के पास दिल्ली व पंजाब के अलावा कहीं से कोई बड़ा स्टार प्रचारक नहीं था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष भगवंत मान के अलावा कुछ नेता ही थे, जो अपने प्रत्याशियों के समर्थन में रैली कर सके।
वर्तमान पार्षदों से नाराजगी
वर्तमान पार्षदों को लेकर लोगों में काफी नाराजगी थी। जो वर्तमान पार्षद जीतें हैं उनकी जीत का अंतर भी न के बराबर है। वहीं, इस बार लोगों ने दिल्ली की तर्ज पर तीसरे विकल्प को चुनने का मन बनाया।