फेज-8 स्थित फोर्टिस अस्पताल में रविवार को एक सार्वजनिक जागरूकता परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से भी ज्यादा लोगों ने भाग लिया।
डायरेक्टर न्यूरोलॉजी डॉ. सुदेश प्रभाकर ने परिचर्चा के दौरान बताया कि स्ट्रोक दरअसल, ऐसी परिस्थिति है, जिसमें दिमाग के हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होती है या गंभीर रूप से कम हो जाती है, जिससे दिमाग के टिशूज को जरूरी ऑक्सीजन और फूड नहीं मिल पाता। उसके बाद चंद मिनटों में ही दिमाग के टिशूज मरने शुरू हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि स्ट्रोक की वजह ब्लॉक्ड आर्टरी या ब्लड वेसल में लीकेज या उसके फटने से होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्ट्रोक के इलाज में जितनी देरी की जाएगी, दिमाग को नुकसान और विकलांगता का जोखिम उतना ही ज्यादा रहता है।
स्ट्रोक के इलाज में, समय का सबसे ज्यादा महत्व रहता है। इसके लिए लोगों के लिए स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में जानना अहम है, ताकि जरूरत पड़ने पर वह सावधानी बरत सकें।
संबंधित रिस्क फेक्टर्स पर चर्चा करते हुए डा. प्रभाकर ने कहा कि स्ट्रोक का खतरा बढ़ाने वाले लाइफ स्टाइल से जुड़े पहलुओं में मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, ज्यादा शराब पीना और कोकीन आदि प्रतिबंधित दवाओं का सेवन शामिल है।