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Harmanpreet Singh: किसान का बेटा बना भारत का स्टार ड्रैग-फ्लिकर, ट्रैक्टर चलाकर मजबूत कीं कलाइयां

Mon, 22 Jul 2024 02:52 PM IST
निवेदिता वर्मा नितिन उपमन्यु, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जंडियाला गुरु बस्ती में एक किसान परिवार में पैदा हुए पेनल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट हरमनप्रीत ने अपने दमदार फ्लिक और डिफेंस के बूते टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम को कांस्य पदक और एशियन गेम्स 2023 में स्वर्ण पदक दिलाया। 
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हरमनप्रीत सिंह। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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अमृतसर के किसान परिवार में जन्मे हरमनप्रीत सिंह जब पिता के साथ खेतों में ट्रैक्टर चलाते थे, तब उन्होंने शायद ही सोचा हो कि एक दिन उनका नाम दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग-फ्लिकर्स में शुमार होगा। वह भारतीय हॉकी टीम के स्टार डिफेंडर व ड्रैग-फ्लिकर हैं। इस बार उनसे पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। 
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हाल ही के वर्षों में उन्होंने अपने खेल से सभी को काफी प्रभावित किया है। पेनल्टी कॉर्नर स्पेशलिस्ट हरमनप्रीत ने अपने दमदार फ्लिक और डिफेंस के बूते टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम को कांस्य पदक और एशियन गेम्स 2023 में स्वर्ण पदक दिलाया। 

उनके प्रदर्शन के दम पर भारत ने ओलंपिक में 41 वर्षों से चले आ रहे पदकों के सूखे को खत्म किया। हरमनप्रीत सिंह ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती गेम में दो गोल कर टोक्यो में भारत के शानदार अभियान की नींव रखी थी। छह गोल के साथ, हरमनप्रीत सिंह टोक्यो में भारतीय हॉकी टीम के शीर्ष स्कोरर रहे।
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उनका जन्म 6 जनवरी, 1996 को अमृतसर के जंडियाला गुरु बस्ती में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन में हरमनप्रीत ने अपने परिवार के साथ खेतों में ट्रैक्टर भी चलाते थे। ट्रैक्टर के गियर बदलने और स्टीयरिंग कंट्रोल करने से उनकी कलाइयों को काफी मजबूती मिली, जो बाद में उनके खेल में काम आई। वह मानते हैं कि इस अभ्यास से उनमें शक्तिशाली तरीके से ड्रैग फ्लिक करने की प्रतिभा विकसित हुई। पिता सरबजीत सिंह पेशे से किसान और उनकी मां राजविंदर कौर गृहिणी हैं। उनके दो भाई भी हैं।

जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन

अपनी प्रतिभा को और निखारने के लिए हरमनप्रीत 2011 में जालंधर के सुरजीत अकादमी में शामिल हुए। जहां उन्होंने सीनियर गगनप्रीत सिंह और सुखजीत सिंह से काफ़ी गुण सीखे, जो पेनल्टी कॉर्नर के स्पेशलिस्ट माने जाते थे। जूनियर कैंप के दौरान कोचों की नजर उनकी काबिलियत पर पड़ी। भारतीय जूनियर हॉकी टीम के पूर्व कोच हरिंदर सिंह ने पहले ही कहा था कि दो साल में हरमनप्रीत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ़्लिकर बन सकते हैं।
 
हरमनप्रीत ने साल 2011 में सुल्तान जोहोर कप में जूनियर नेशनल टीम के लिए डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने मैदान पर गोल की बारिश कर दी। तीन साल बाद हरमनप्रीत ने 2014 सुल्तान जोहोर कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता। जहां उन्होंने मलेशिया में यूथ टूर्नामेंट में नौ गोल किए और भारत को शीर्ष पुरस्कार जीतने में मदद की। इस प्रदर्शन के आधार पर 3 मई, 2015 को एक टेस्ट सीरीज़ के दौरान उन्होंने जापान के खिलाफ मैदान में कदम रखा।

रियो में ओलंपिक डेब्यू 

हरमनप्रीत ने युवा टीम के लिए भी खेलना जारी रखा और 2015 में जूनियर पुरुष एशिया कप का खिताब जीता, जहां उन्होंने 14 गोल किए। सीनियर स्तर पर, हरमनप्रीत ने 2016 में सुल्तान अजलान शाह कप के दौरान भारत के लिए अपना पहला गोल किया। इस प्रदर्शन की बदौलत उन्हें रियो 2016 खेलों के लिए ओलंपिक टीम में जगह मिल गई। हरमनप्रीत ने 2016 जूनियर विश्व कप जीतकर अपने हुनर को साबित किया। हरमनप्रीत ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को रजत पदक जीतने में भी अहम भूमिका निभाई। 

200 मैचों में 150 से अधिक गोल

राष्ट्रीय टीम के लिए लगभग 200 मैचों में 150 से अधिक गोल करने के बाद, हरमनप्रीत सिंह ने हांगझोऊ में एशियन गेम्स 2023 में टीम को स्वर्ण पदक दिलाया, जिससे भारत ने पेरिस 2024 ओलंपिक गेम्स में भी अपनी जगह पक्की कर ली। हरमनप्रीत सिंह हांगझोऊ में 13 गोल के साथ भारत के सर्वोच्च स्कोरर रहे, जिसमें जापान के खिलाफ स्वर्ण पदक मैच में उनके दो गोल शामिल थे। उन्होंने टीम को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2023 का खिताब भी दिलाया था।

प्रमुख उपलब्धियां  

-टोक्यो 2020 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।
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-टोक्यो 2020 में भारतीय हॉकी टीम के शीर्ष स्कोरर रहे।
-एफआईएच प्रो लीग 2021-22 में शीर्ष स्कोरर रहे।
-पुरुष हॉकी विश्व कप 2023 में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान।
-बर्मिंघम में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2022 में रजत पदक जीता।
-एशियन गेम्स 2023 में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
-एशियन गेम्स 2023 में 13 गोल के साथ भारत के शीर्ष स्कोरर रहे।
-एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2023 में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
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