फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Anil Masih: कौन हैं चंडीगढ़ मेयर चुनाव के पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह.... जिन्हें पड़ी थी 'सुप्रीम' फटकार

Thu, 08 Feb 2024 04:08 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

Chandigarh Mayor Election Controversy चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटर्निंग अधिकारी अनिल मसीह को लताड़ा था। सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को नष्ट किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इसके बाद आप और कांग्रेस अनिल मसीह पर हमलावर हो गई थी।
विज्ञापन
अनिल मसीह - फोटो : फाइल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ में 30 जनवरी को हुए मेयर चुनाव पर उठा विवाद अभी तक नहीं थमा है। मामला पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। 

विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मनोनीत पार्षद और मेयर चुनाव के पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद से अनिल मसीह सोशल मीडिया पर सर्च में आ गए हैं। लोग जानना चाहते हैं कि अनिल मसीह कौन है, जिनके ऊपर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में वोटों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा है। 


विज्ञापन

   
चुनाव के बाद सबको लगा था कि अनिल मसीह कोई ब्यूरोक्रेट हैं लेकिन अब धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी है। मसीह भाजपा के सक्रिय नेता हैं। उन्होंने 2011 में भाजपा के माइनॉरिटी विंग में एंट्री ली थी। इसके बाद से वे धीरे-धीरे पार्टी में सक्रिय होने लगे। उन्हें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद का करीबी माना जाता है। उनकी सक्रियता को देखते हुए ही उन्हें माइनॉरिटी मोर्चा में महामंत्री का पद दिया गया। वह कई साल माइनॉरिटी मोर्चा में महामंत्री रहे लेकिन कुछ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी की नई कार्यकारिणी का गठन हुआ। 

जतिंदर पाल मल्होत्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हाल ही में माइनॉरिटी मोर्चा के संयोजक के नाम की घोषणा की गई है, लेकिन उसके अन्य सदस्यों के नाम की घोषणा नहीं हुई है, इसलिए अनिल मसीह के पास वर्तमान में भाजपा के अंदर कोई पद नहीं है लेकिन वह अब भी भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। 

2022 में बने थे मनोनीत पार्षद
2022 में पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित के रिकमेंडेशन पर उन्हें मनोनीत पार्षद बनाकर निगम में भेजा गया था। तब से वह निगम की सभी बैठकों में हिस्सा लेते हैं। 
विज्ञापन


पूर्व मेयर के सुझाव पर बने थे पीठासीन अधिकारी
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हर वर्ष किसी पार्षद को ही पीठासीन अधिकारी बनाया जाता है। यह प्रथा 1996 से ही चली जा रही है। इस वर्ष मेयर चुनाव की घोषणा 10 जनवरी को की गई थी। पूर्व मेयर अनूप गुप्ता के सुझाव पर डीसी विनय प्रताप सिंह ने अनिल मसीह को मेयर चुनाव के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया था। 

18 जनवरी को मसीह की तबीयत खराब होने के कारण टल गए थे चुनाव
पहले मेयर चुनाव 18 जनवरी को होने थे लेकिन उसी दिन अनिल मसीह की तबीयत खराब हो गई जिसके बाद चुनाव टाल दिया गया था। इसके बाद प्रशासन ने छह फरवरी को मेयर चुनाव कराने की घोषणा की लेकिन आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के मेयर पद की उम्मीदवार कुलदीप कुमार जल्द चुनाव कराने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को चुनाव कराने के आदेश दिए। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में 30 जनवरी को चुनाव हुए। चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर 16 वोट पाकर जीत गए। वहीं आप और कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी को 12 वोट मिले। गठबंधन के 8 वोट अमान्य कर दिए गए। इसके बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया। चुनाव में वोटों की गिनती के दौरान छेड़छाड़ करने का आरोप अनिल मसीह पर लगा था।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें