चंडीगढ़। वर्ल्ड टूरिज्म वीक के तहत यूआईएचटीएम की ओर से पीयू में शुक्रवार को कवि सम्मेलन से लेकर फैशन शो का आयोजन हुआ। इस दौरान कवियों ने महफिल सजाई। वहीं ग्रुप डांस में कई राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली। गीत संगीत से पूरा कैंपस झूम उठा। तालियां भी आसमां में खूब गूंजी। इस कार्यक्रम का अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
कार्यक्रम का शुभारंभ ओपन एयर थिएटर में पीयू की पूर्व डीयूआई एवं यूआईएचटीएम की पूर्व निदेशक प्रो. मीनाक्षी मल्होत्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने विद्यार्थियों में जोश भरा। साथ ही सफलता के मंत्र भी दिए। इस दौरान हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह, पंजाबी विभाग अध्यक्ष प्रो. योगराज अंगरीश ने भी विचार रखे। अंग्रेजी उसके बाद कवियों ने कविता पाठ किया और युवाओं को खूब हंसाया भी और प्रेम की कविताएं सुनाकर उनके दिल को छूने की कोशिश भी की।
कवि एवं फिल्म निर्देशक विजय कपूर ने काव्य पाठ किया। उन्होंने कोतवाली से जामनगर जाते कविता हुआ करती थी, चामुंडा से नगरोटा आते हुए कविता हुआ करती थी.. सुनाई। कवि सुशील हसरत ने- किसी के दिल में चुपके से उतरना ठीक है क्या, अगर उतर ही गए तो फिर खिसकना ठीक है क्या... कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। कवयित्री डॉ. दलजीत कौर ने - विश्वास की शर्त थी खुद के सिवा कभी मत करना किसी पर विश्वास, मेरी खता भी यही थी, खुद के सिवा सब पर विश्वास किया.. सुनाकर सबका मन मोह लिया। वरिष्ठ साहित्यकार, व्यंगकार एवं हिमाचल भवन सूचना विभाग से उप निदेशक डॉ. गुरमीत बेदी ने व्यवस्था, ब्यूरोक्रेसी, राजनीति पर कटाक्ष किया। उन्होंने मैं पति परमेश्वर हूं, व्यंग्य सुनाया। इसी तरह कवि प्रेम विज, कवि अमरजीत अमर ने भी कविता सुनाई।
युवा कवियों ने भी सजाई महफिल
इसी कड़ी में पीयू के स्टूडेंट्स ने भी स्व:रचित कविताएं सुनाई। नवोदित कवि अंग्रेजी विभाग से प्रखर, अजय चौधरी, बिहार निवासी आकाश रंजन, राहुल सागवान, निहारिका, काजल, नंद किशोर आदि ने काव्य पाठ किया। रात नौ बजे ग्रुप डांस का शुभारंभ पीयू वीसी प्रो. राजकुमार ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मंच मिलने से उनकी कला में और निखार आएगा। उन्होंने पेंटिंग, ग्रुप डांस, फैशन शो के विजेताओं को सम्मानित किया। इस मौके पर चीफ को-ऑर्डिनेटर एवं यूआईएचटीएम विभाग के प्रो. प्रशांत गौतम, विभाग अध्यक्ष प्रो. अनीस सलथ, समन्वयक प्रो. लिपिका गुलियानी, प्रो. भारत, प्रो. अरुण कुमार ठाकुर आदि रहे। संचालन कवि गुरमीत बेदी, छात्र ईशान, छात्रा लक्षिता ने किया।