किसानों ने 29 फरवरी को पेश किया गया आम बजट नकार दिया है। इसके विरोध में किसान यूनियन दिल्ली में रोष मार्च निकालेगी। चंडीगढ़ किसान भवन में भारतीय किसान यूनियन की बैठक हुई। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में केंद्रीय आम बजट को नकारते हुए इसकेखिलाफ आंदोलन छेड़ने का फैसला किया गया। भाकियू प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट किसानों के साथ छलावा है। इसमें सिर्फ आंकड़ों और शब्दों की जादूगरी है। असल में इससे किसानों को कुछ नहीं मिलेगा।
किसान रोज आत्महत्याएं कर रहे हैं, लेकिन बजट में किसानों के लिए एक धेला नहीं है। किसानों को कर्ज की राशि तो बढ़ा कर नौ लाख करोड़ कर दी गई है, लेकिन बैंकों द्वारा 14.5 प्रतिशत ब्याज, प्रोसेसिंग फीस व वकीलों के खर्च की वसूली में कोई राहत नहीं दी गई है।
इस साल सरकार ने खेती केलिए 35984 करोड़ रखे हैं, जोकि 2005 के बजट से भी कम हैं। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया है, पर इसके लिए कोई तरीका नहीं बताया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पहले ही पंजाब सरकार रद्द कर चुकी है।
इससे गेहूं-धान पर 1300 रुपये, कपास पर दो हजार, गन्ने पर पांच हजार रुपये प्रति एकड़ प्रीमियम केरूप में टैक्स तो लग जाएगा, लेकिन गांव को एक यूनिट मानने केकारण किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। राजेवाल ने कहा कि सरकार स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने के वादे से भाग गई। उल्टे, किसानों पर आयकर लगाने की योजना बनाई जा रही है।
सरकार ने खादों पर सब्सिडी में तीन हजार करोड़ की कटौती कर दी है। सब्सिडी किसानों केखातों में देने का एलान किया है। अनपढ़ किसान इसे हासिल करने को फिर भ्रष्टाचार का शिकार हो जाएंगे। बजट केविरोध में किसान आठ मार्च को तहसील स्तर पर रोष प्रदर्शन करकेमांगपत्र देंगे। उसकेबाद 29 मार्च को दिल्ली में संसद की ओर रोष मार्च किया जाएगा।