किसान आंदोलन की वजह से पानीपत-जालंधर एनएच टोलवे प्राइवेट लिमिटेड को हो रहे रोजाना के 1.3 करोड़ के नुकसान पर अब हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा, पंजाब और एनएचएआई (राष्ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका दाखिल करते हुए कंपनी ने बताया कि किसान आंदोलन आरंभ होने के बाद से ही लगातार उनका राजस्व गिरता चला गया। इसी बीच एनएचएआई ने टोल बंद करने वालों को रोकने के स्थान पर टोल को अपने हाथों में ले लिया।
याची ने बताया कि लाडोवाला, घग्गर और घरौंड़ा में उनके तीन टोल हैं। कंपनी को कुल 77.28 करोड़ का घाटा हुआ है। एनएचएआई द्वारा इसके बाद 25 दिसंबर को सभी टोल बंद कर दिए गए। इससे पहले मामूली राजस्व मिल रहा था जो पूरी तरह से बंद हो गया। याची कंपनी ने बताया कि इस मार्ग के लिए कंपनी ने 5689 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
याची ने कहा कि टोल का नियंत्रण लेने के और इसे सस्पेंड करने के आदेश को पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। याची ने कहा कि लगातार बढ़ती आंदोलन की अवधि के चलते टोल के दोबारा आरंभ होने के फिलहाल आसार नहीं दिखाई दे रहें हैं। ऐसे में याची को वित्तीय घाटा न हो इसके लिए आवश्यक कदम सुनिश्चित करने के आदेश जारी करने की याची ने अपील की है। याची ने कहा कि उसके नुकसान की भरपाई की जाए और हाईकोर्ट जो आवश्यक समझे आदेश पारित करे। हाईकोर्ट ने याचिका पर अब सभी पक्षों से जवाब मांग लिया है।