सरकार व किसानों के बीच बातचीत का रास्ता जल्द खुल सकता है। रिहाई व मुकदमे वापसी के मुद्दे पर किसान नरम पड़ते दिख रहे हैं। किसान नेताओं ने बातचीत से पहले जेल में बंद लोगों की रिहाई व मुकदमा वापसी की शर्त रखी थी और यह शर्त ही सरकार व किसानों के बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी। किसान नेताओं का मानना है कि इसका हल बातचीत से निकलेगा और जिस तरह से सरकार पहले प्रस्ताव देकर बुलाती रही है, वह उस तरह ही बुलाती है तो किसान पहले की तरह बातचीत के लिए तैयार हैं।
कृषि कानून रद्द कराने के लिए करीब 80 दिनों से किसान सड़कों पर डटे हुए हैं। इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो एक बार गृहमंत्री अमित शाह के साथ भी बातचीत हुई थी। किसानों व सरकार के बीच बातचीत में भले ही कोई हल नहीं निकला हो, लेकिन यह जरूर है कि इनके बीच बैठक का दौर लगातार जारी था। किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और अब करीब 22 दिन बीतने के बाद भी सरकार व किसानों के बीच कोई बैठक नहीं हुई है।
जहां ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलन सिमटता देखकर सरकार की ओर से बातचीत की पहल नहीं की गई तो किसान आंदोलन दोबारा खड़ा हुआ तो किसान नेताओं ने बातचीत के लिए सरकार के सामने नई शर्तों को रख दिया। ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद पुलिस ने करीब 120 लोगों को गिरफ्तार किया था और सैकड़ों किसानों पर मुकदमे दर्ज है। किसानों ने एलान किया कि सरकार से बातचीत तभी होगी, जब जेल में बंद लोगों की रिहाई होगी और उनपर दर्ज मुकदमे खत्म होंगे।
किसानों की यह शर्त ही सरकार से बातचीत में बाधा बन गई और सरकार व किसानों के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। लेकिन अब यह गतिरोध खत्म होने की उम्मीद जगी है तो सरकार व किसानों के बीच जल्द बातचीत का रास्ता भी खुल सकता है। क्योंकि किसान नेता लोगों की रिहाई व मुकदमे वापसी की शर्त पर कुछ नरम पड़े है और उनको लगता है कि बातचीत का रास्ता बंद हो जाएगा तो किसानों की समस्याओं का हल नहीं निकल सकता है। इसलिए सरकार से बातचीत का रास्ता खोलकर भी इन मुद्दों को रखा जा सकता है। किसान अब पहले की तरह से सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह अपनी तरफ से प्रस्ताव नहीं भेजेंगे। वह पहले की तरह सरकार से प्रस्ताव चाहते है और उसके बाद ही बातचीत के लिए जाने को तैयार है।
सरकार से हम बातचीत के लिए तैयार है और हमारी तरफ से बातचीत का रास्ता कभी बंद नहीं हुआ था। किसानों की समस्याओं का हल बातचीत से निकल सकता है और हम पहले की तरह बातचीत करने को तैयार है। सरकार जिस तरह से बातचीत के लिए बुलाती थी, वह अब भी उस तरह से बातचीत के लिए बुलाए तो हम बैठकर समस्या का हल निकालने का प्रयास करेंगे। अगर सरकार अब भी बातचीत के लिए तैयार नहीं होती है तो हमे कड़े फैसले लेने होंगे।
गुरनाम चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा
जिस तरह से पहले सरकार के साथ बातचीत होती रही है, उस तरह ही हम बातचीत के लिए तैयार है। किसानों की समस्या का हल किस तरह से निकाला जाएगा, यह बातचीत करके हो सकता है। सरकार बातचीत के लिए बुलाती है तो हम किसानों के मुद्दों को रखेंगे। अब यह देखना होगा कि बातचीत का सिलसिला कब शुरू होगा।
अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा