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दिल्ली दूर नहीं: आरपार के मूड में किसान, नहीं दिख रहा समाधान, फैसला अब केंद्र के हाथ

Fri, 27 Nov 2020 04:15 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • किसान आंदोलन पर संयम बरत रही प्रदेश सरकार के पास आंदोलन के निपटान का कोई रास्ता नहीं
  • आंदोलनरत किसान नेता भी इस मसले पर सिर्फ केंद्र से बात करने की जिद पर अडे़
  • नाके तोड़कर आगे बढ़े किसान, जाम से प्रदेश में जनता होती रही हलकान
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलन की तपिश बढ़ती जा रही है। आंदोलनरत किसान आर पार के मूड में हैं और प्रदेश सरकार को भी फिलहाल किसानों के इस आंदोलन का कोई समाधान नहीं दिख रहा है। किसान नेता भी इस मसले पर अब राज्य के बजाय केंद्र सरकार से ही बात करने पर अड़े हैं। इसलिए किसानों के इस आंदोलन को कैसे खत्म किया जाए, इसका फैसला भी केंद्र सरकार को ही लेना पड़ेगा। 

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राज्य सरकार किसानों को सिर्फ आश्वासन दे रही है। आंदोलन के लिए गठित संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि अब बात सिर्फ केंद्र सरकार से होगी। राज्य सरकारों के आश्वासनों पर उन्हें भरोसा नहीं है। किसानों के दिल्ली कूच आंदोलन के पहले दिन हरियाणा के भीतर और पंजाब की सीमाओं पर अच्छा खासा हंगामा हुआ। 

हरियाणा पुलिस को प्रदेश के साथ-साथ पंजाब के किसानों से भी जूझना पड़ा। पंजाब से सटे अंबाला, सिरसा, करनाल, कुरुक्षेत्र व कैथल जिलों में पंजाब के किसानों को लेकर प्रदेश पुलिस ने जबरदस्त नाकाबंदी की हुई थी। बैरिकेडिंग के साथ-साथ यहां विशाल पत्थर भी किसानों को रोकने के लिए क्रेनों की मदद से सड़कों पर रखवाए गए थे। पंजाब के ये किसान हरियाणा से गुजरकर ही दिल्ली जाने के लिए हजारों ट्रैक्टर-ट्रालियां लेकर पंजाब सीमाओं पर डटे हुए थे।

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जैसे ही इन किसानों ने इन जिलों में विभिन्न नाकों को पार कर हरियाणा में घुसने की कोशिश की तो, जबरदस्त बवाल हो गया। चूंकि पुलिस को सरकार ने पूरी तरह संयम बरतने के आदेश दिए थे इसलिए किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग, विशाल पत्थरों की रूकावट के साथ-साथ वाटर कैनन और आंसू गैस गोलों का इस्तेमाल किया गया। लाठीचार्ज से पुलिस ने पूरी तरह परहेज रखा। मगर पुलिस प्रयास विफल ही दिखाई दिए। काफी संख्या में किसानों ने बैरिकैडिंग तोड़ दिए और अपने वाहनों के साथ मुख्यमार्गों पर दिल्ली की ओर आगे बढ़ गए हैं।

शंभू, सादोपुर, मुंडाल, टोहाना, डबवाली बॉर्डर पार, आज पहुंचेंगे दिल्ली
पंजाब के किसानों ने हरियाणा में घुसकर तीन बॉर्डर शंभू, सादोपुर, मुंडाल, टोहाना और डबवाली बॉर्डर क्रास कर लिया है। हालांकि इन सभी सीमाओं पर पुलिस और किसानों का टकराव हुआ। पुलिस ने उन्हें अपने तरीकों से रोकने का प्रयास किया, मगर सब रूकावटें झेलते हुए किसान हरियाणा-पंजाब की यह तीनों सीमाएं पार कर गए। उधर, दिल्ली-गुरुग्राम और कुंडली बॉर्डर पर भी अतिरिक्त पुलिस बल बढ़ा दिया गया है। यहां सुरक्षा के चाकचौबंद इंतजाम हैं और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की तैनाती भी कर दी गई है। किसान नेताओं का कहना है कि 27 नवंबर को हजारों किसान दिल्ली दाखिल होंगे।

दो नेशनल हाईवे के हालात ज्यादा खराब, जाम की जद में प्रदेश
किसानों के इस आंदोलन ने हरियाणा को जाम की जद में घेर दिया है। किसानों को रोकने के लिए प्रदेश पुलिस ने सूबे में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों को बंद कर रखा है। दिल्ली में प्रवेश करने वाले नेशनल हाईवे नंबर-10 (हिसार-रोहतक-दिल्ली) और नेशनल हाईवे-44 (अंबाला-पानीपत-दिल्ली) पर हालात ज्यादा खराब रहे। इसी वजह से वाहन चालकों को बहुत ज्यादा परेशान होना पड़ा। पुलिस नाकों की वजह से वाहनों की लंबी कतारें मुख्य मार्गों पर लगी रही और रूट डायवर्ट करने की वजह से अधिकतर वाहन चालकों को अपने गंतव्यों तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर अतिरिक्त लंबा रास्ता तय करना पड़ा।
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डीजीपी बोले- आपराधिक तरीके से आगे बढ़े किसान

हरियाणा के डीजीपी मनोज यादव ने किसानों के इस रवैये को असंविधानिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसानों ने गलत तरीके से बल प्रयोग करते हुए न केवल पुलिस के बैरिकेड क्षतिग्रस्त किए, बल्कि आपराधिक तरीके से सभी अवरोधक को हटाते हुए वे आगे बढ़ते गए। इस पर भी पुलिस ने संयम से काम लेते हुए आंदोलनकारी किसानों पर बल प्रयोग नहीं किया। 

डीजीपी ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक व शरारती तत्व भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों से अपने दिल्ली चलो अभियान को राज्य व देशहित को देखते हुए वापस लेने की अपील भी की। उन्होंने किसानों से उन लोगों से सतर्क रहने का भी आग्रह किया जो अपने स्वार्थ के लिए किसानों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।

पुलिस गाड़ियों पर पथराव, शीशे तोड़े, जवान घायल
पुलिस और किसानों के बीच विभिन्न नाकों पर हुए टकराव में पुलिस को पथराव भी झेलना पड़ा जिसमें कुछ पुलिस कर्मियों को चोटें भी आईं। डीजीपी मनोज यादव के अनुसार पुलिसकर्मी किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए पूरा संयम बरत रहे हैं, मगर कुछ नाकों पर हालात थोड़े खराब हो गए। 

जिसके चलते किसानों ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई स्थानों पर पुलिस पर पथराव कर कानून व्यवस्था को भंग करने की कोशिश की। इस सारे प्रकरण में न केवल कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं, बल्कि पुलिस की गाड़ियों सहित निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाते हुए उनके शीशे भी तोडे़ गए।
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