किसान आंदोलन में आईटी सेल लगातार नया प्रयोग कर रही है, जिससे सरकार को यह दिखाया जा सके कि आंदोलन को कितने लोग समर्थन दे रहे हैं तो कानूनों के खिलाफ कितने किसान खड़े है। इसके लिए ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिसमें किसानों के समर्थन में अभी तक एक लाख 80 हजार 871 लोग ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके है तो कानून के विरोध में अभी तक 84917 लोग ऑनलाइन हस्ताक्षर कर चुके है। इस तरह से तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है।
आंदोलन से सरकार को घबराहट है और सरकार ने खुफिया एजेंसियों व किसान विरोधी लोगों को लगा दिया है। प्रचार किया जा रहा है कि किसान नेता गलत हैं। वह सरकार के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसी बात पर विश्वास नहीं किया जाए और सभी किसान संगठन साथ है। ऐसा कोई नेता नहीं है जो अपने बच्चों का भविष्य खराब करेगा और खुद को गद्दार कहलवाएगा। इसके साथ ही कोई युवा गाने बजाकर नाचता है तो वह बहुत गलत है। यहां किसान हक की लड़ाई में शहीद हो रहे हैं और कुछ लोग आंदोलन को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार यह समझती है कि वह आंदोलन को तोड़ देगी तो यह उसकी गलतफहमी है। ऐसे लोगों की पहचान कर अब पुलिस के हवाले किया जाएगा। बलबीर सिंह राजेवाल, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा।
इस आंदोलन की आग पूरे देश में फैल चुकी है। आंदोलन के पक्ष में दुनियाभर में लोग खड़े हुए हैं और आंदोलन के दबाव में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने आने से इनकार किया है। सरकार एक साजिश कर रही है, जिसमें लोगों के पास एक कंप्यूटराइज्ड कॉल आ रही है। जिसमें कृषि कानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है और आंदोलन को गलत कहा जा रहा है। इस तरह से भ्रांतियां फैलाई जा रहीं है, जबकि किसानों को सच्चाई पता है कि कृषि कानून किसान विरोधी है। इसलिए सभी को एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाना है, जिससे सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े।
राजेंद्र सिंह दीप सिंहवाला, उपाध्यक्ष कीर्ति किसान यूनियन।