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कृषि कानून : पंजाब भर में किसानों ने किया विरोध-प्रदर्शन, भाजपा सांसद हंसराज हंस का घर भी घेरा

Mon, 14 Dec 2020 09:16 PM IST
ajay kumar अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब
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अमृतसर में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर सोमवार को पूरे पंजाब में 32 किसान संगठनों ने जिला स्तर पर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के समक्ष भारी संख्या में किसानों, खेत मजदूरों, महिलाओं और बुजुर्गों ने प्रदर्शन किया। किसान संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर तीनों कृषि कानूनों, बिजली संशोधन बिल 2020 और पराली अध्यादेश रद्द नहीं किए गए तो दिल्ली की सीमाओं पर जारी आंदोलन और बड़ा कर दिया जाएगा। 

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भारतीय किसान यूनियन एकता (डकोंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने कहा कि पंजाब भर में किसान संगठनों को शहरी लोगों, नौजवानों, विद्यार्थियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, व्यापारियों समेत सभी वर्गों का भरपूर समर्थन मिला है। प्रत्येक जिले में लोगों ने सोमवार को रोष प्रदर्शनों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया, जिससे यह साबित हो गया है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लोगों का विरोध रोजाना तेज हो रहा है।


जालंधर में भाजपा सांसद हंसराज हंस का आवास घेरा
कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को किसानों ने नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से भाजपा सांसद हंसराज हंस के जालंधर स्थित घर का घेराव किया। मुख्य मार्ग पर स्थित हंसराज हंस के घर के सामने अलग-अलग वाहनों में पहुंचे किसानों ने सड़क पर बैठकर धरना देते हुए ट्रैफिक जाम कर दिया। उन्होंने सांसद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान भारी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के सदस्य नकोदर से रोष मार्च निकालते हुए बड़ी संख्या में यहां पहुंचे। 
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किसान नेताओं ने धरने में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कृषि कानून वापस लेने की मांग की। किसानों ने पूर्व मंत्री और भाजपा नेता मनोरंजन कालिया का घर घेरने की भी चेतावनी दी है। सांसद के घर धरना प्रदर्शन के बाद किसान रोष मार्च करते हुए बीएमसी चौक से होते हुए डीसी ऑफिस के लिए रवाना हो गए। किसानों के रोष प्रदर्शन के कारण शहर की लगभग सभी सड़कों पर जाम लगा रहा। पुलिस ने जिला प्रशासनिक कांप्लेक्स की तरफ जाने वाली सभी सड़कों की बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसके बावजूद किसान संगठनों के सदस्य पैदल रोष मार्च कर धरनास्थल तक पहुंच गए।


                                               हंसराज हंस के घर का घेराव करते किसान।


पटियाला: किसान बोले- थोपे जा रहे कृषि कानून
कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को विभिन्न किसान संगठनों ने डीसी दफ्तर के आगे धरना दिया। इस मौके पर कृषि कानूनों के साथ-साथ बिजली संशोधन एक्ट को भी रद्द करने की मांग की गई। धरना देने वाली संगठनों में क्रांतिकारी किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी, भारतीय किसान यूनियन डकौंदा, किरती किसान यूनियन, जमहूरी किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन लखोवाल, कुल हिंद किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के सदस्य बड़ी संख्या में पहुंचे। किसान नेता गुरमीत दित्तूपुर, सतवंत वजीदपुर, बलदेव सिंह बठोई, पूरन चंद ने कहा कि मोदी सरकार देश के बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों पर यह कृषि कानून थोप रही है। 

किसानों ने किसी सियासी दल को नहीं दी धरने में जगह

लुधियाना में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन सोमवार को 19 वें दिन में प्रवेश कर गया है। मिनी सचिवालय के बाहर किसान यूनियन के धरने में पहुंचे एक राजनीतिक दल को किसान संगठनों ने जगह नहीं दी और उन्हें साफ तौर पर धरने से चले जाने को कहा। वहीं ट्रेड संगठनों के साथ मिलकर किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर किसान ट्रैक्टर-ट्राली लेकर धरना स्थल पहुंचे। किसान यूनियन ने दोपहर बाद फिरोजपुर रोड पर चक्का जाम कर दिया। आखिरकार डीसी वरिंदर शर्मा किसानों का मांग पत्र लेने मौके पर पहुंचे। इसके बाद किसान नेताओं ने जाम खोला।

उल्लेखनीय है कि यूनियन नेताओं ने किसान धरने में किसी भी सियासी दल के नेता को नहीं घुसने दिया। किसान नेताओं ने पहले ही एलान कर दिया था कि वह अपना मंच किसी दल के साथ साझा नहीं करेंगे। किसानों के इस रवैये को देखते हुए सीपीआई के कार्यकर्ताओं ने किसान धरने से उठकर मिनी सचिवालय से कुछ दूरी पर स्थित श्री गुरुनानक भवन के पास धरना दिया। 


                                                जालंधर में किसानों का प्रदर्शन।

कृषि आंदोलन: संगरूर में डीसी दफ्तर का किया घेराव
संगरूर में कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान संगठनों के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिलाध्यक्ष अमरीक सिंह गंढूआं के नेतृत्व में किसानों ने डीसी दफ्तर का घेराव करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शन में बड़ी तादाद में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भाग लिया। 

‘जितने किसान दिल्ली के पास बैठे हैं, उससे अधिक अभी पंजाब में हैं’ 

भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर विभिन्न किसान संगठनों ने डिप्टी कमिश्नर दफ्तर मुक्तसर का घेराव किया गया। इस दौरान प्रदर्शन में मजदूरों, आढ़तियों, दुकानदारों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। सुबह 11 से तीन बजे तक चले प्रदर्शन में केंद्र सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की गई। 

किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार किसानी को बर्बाद करने के हथकंडे अपना रही है। ऐसा हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरने का उद्देश्य केंद्र सरकार को यह दिखाना है कि जितने किसान दिल्ली के पास बैठे हैं, उससे अधिक पंजाब में हैं। अगर सभी किसान धरने में टिकरी बॉर्डर पर आ गए तो दिल्ली का क्या हाल होगा। केंद्र सरकार चाहे कुछ भी कर ले लेकिन किसान अब इन कानूनों को रद्द करवाकर ही रहेंगे। 

गढ़शंकर में एसडीएम दफ्तर पर दिया धरना
दिल्ली में संघर्ष कर रहे किसानों के समर्थन में सोमवार को कड़ाके की ठंड में किरती किसान यूनियन व अन्य संगठनों ने एसडीएम कार्यालय के सामने धरना दिया। सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक लगाए धरने को किरती किसान यूनियन के नेता कुलविंदर चाहल, प्रो. कुलवंत सिंह गोलेवाल, प्रो. संधू वरियाणवी, रामजीत सिंह सरपंच, बीरइंद्र सिंह सिंबली, चरनजीत सिंह सरपंच पनाम, डीटीएफ नेता मुकेश गुजराती व सुखदेव डानसीवाल ने संबोधित किया।

पठानकोट : केंद्र सरकार के खिलाफ शाम चार बजे तक की नारेबाजी 

मलिकपुर स्थित मिनी सचिवालय के डीसी दफ्तर के सामने किसानों के साथ विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले रोष प्रदर्शन किया। सोसायटी प्रदेश उपाध्यक्ष जसवंत सिंह कोठी प्रेम सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ शाम चार बजे तक नारेबाजी की। किसानों के आंदोलन के समर्थन में उतरे खेतीबाड़ी विभाग, रेवेन्यू पटवार यूनियन, थीन डैम वर्कर यूनियन ने धरने में शामिल होकर रोष जताया।

गुरदासपुर : समर्थन में उतरे डॉक्टर, वकील और नौजवान
कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को किसानों ने डीसी कार्यालय का घेराव किया। धरने में किसानों के साथ डॉक्टर, वकील, विभिन्न सामाजिक संगठन भी पहुंचे। किसान केंद्र सरकार के खिलाफ खूब गरजे। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। किसानों का धरना छह घंटे चला। हालांकि इससे पहले भारी संख्या में किसान नेहरू पार्क में इकट्ठे हुए। जिसके बाद उन्होंने डीसी कार्यालय समक्ष रोष मार्च निकाला।

रोपड़ में नेताओं को मंच से किसानों ने नहीं बोलने दिया 
कृषि कानून रद्द करवाने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने सोमवार को डीसी दफ्तर के समक्ष धरना प्रर्दशन किया। इस दौरान अकाली दल तथा आम आदमी पार्टी के नेताओं के अलावा कई मजदूर संगठन और अलग-अलग यूनियनों के नेता भी हाजिर रहे। किसानों ने सियासी पार्टियों के नेताओं को मंच से संबोधित करने का समय नहीं दिया। 

इस दौरान किसान संगठनों ने डीसी को मांग पत्र सौंपा और कृषि कानून रद्द करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने डीसी दफ्तर को जाने वाली सड़क को एक तरफ से पूरी तरह बंद कर दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय युवा पुरस्कार प्राप्त सुनील सरथली ने अपना पुरस्कार भी डीसी के द्वारा देश के राष्ट्रपति को वापस किया। सुनील सरथली ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में वह यह पुरस्कार वापस कर रहे है। 
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होशियारपुर : ट्रैक्टर-ट्रालियों में निकाला रोष मार्च

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने जिला प्रशासकीय परिसर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इसमें बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न गांवों के किसानों ने भाग लिया। सबसे पहले किसान रोशन ग्राउंड में इकट्ठा हुए, जिसके बाद शहर में ट्रैक्टर-ट्रालियों, बसों, कारों और अन्य वाहनों के जरिये रोष मार्च निकाला गया। वहीं धरने में किसानों के साथ-साथ विभिन्न श्रमिक, कर्मचारी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के अलावा, अन्य सहयोगी संगठनों ने भाग लिया। 

केंद्र सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
फरीदकोट। सोमवार को मिनी सचिवालय में डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के सामने किसानों ने रोष धरना दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई। इस रोष प्रदर्शन में किसानों के साथ साथ आढ़ती, मजदूर, कीटनाशक व बीज विक्रेताओं समेत विभिन्न कर्मचारी, पेंशनर संगठनों के कार्यकर्ताओं व बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। उधर, फाजिल्का में भी किसानों ने डीसी दफ्तर के आगे धरना दिया।

बरनाला : भाकियू उगराहां ने चार घंटे डीसी दफ्तर घेरा
भाकियू उगराहां ने बरनाला में डीसी दफ्तर का चार घंटे तक घेराव कर प्रदर्शन किया। वहीं शहर में सैकड़ों वाहनों पर किसानों ने रोष मार्च निकाला गया। इस दौरान वाहन चालकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी व पूरा शहर जाम में फंस गया। जिला प्रधान चमकौर व जरनैल सिंह बदरा ने कहा कि भाकियू एकता उगराहां ने बरनाला में अनाज मंडी से डीसी दफ्तर तक रोष रैली निकाली। रैली में सैकड़ों की संख्या में महिलाओं समेत युवक व बुजुर्ग किसान शामिल हुए। 
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