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कृषि कानूनों पर अब आंदोलन को काला बनाम सफेद करने की तैयारी, गांधीगीरी पर रहेगा जोर

Sun, 07 Feb 2021 02:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा यशपाल शर्मा, चंडीगढ़

सार

  • किसान संगठन सरकार से पूछेंगे कि अगर कानून काले नहीं तो इनमें सफेद क्या
  • दिल्ली उपद्रव के बाद अब गांधीगीरी पर रहेगा अन्नदाता का जोर
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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किसानों ने अब आंदोलन को नया मोड़ देने की तैयारी कर ली है। अन्नदाता अब आंदोलन को नए कृषि कानूनों पर काला बनाम सफेद करने की तैयारी में हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) हरियाणा ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। अब आंदोलन को जनांदोलन बनाने के लिए गांधीगीरी पर जोर रहेगा। दिल्ली उपद्रव के बाद किसान नेताओं ने यह बड़ा सबक लिया है।

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यूनियन इस संबंध में अपने साथ संयुक्त किसान मोर्चा को भी विश्वास में ले रही है। किसान संगठन अब केंद्र सरकार से पूछेंगे कि कानून अगर काले नहीं तो इनमें सफेद क्या है। अगर कानून सही हैं तो सरकार संशोधनों के लिए क्यों तैयार हुई। अब कानूनों को लेकर काला बनाम सफेद क्यों बनाया जा रहा। सरकार के नुमाइंदों ने खुद ही इन कानूनों को कुछ समय तक टालने का भी प्रस्ताव रखा था।

भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा दूसरी बैठक में ही सरकार को लिखित में दे चुका है कि कानूनों में काला क्या है? अब तक सरकार किसानों को सभी दौर की वार्ता में यह नहीं समझा पाई है कि कानूनों में सफेद क्या है। इसलिए सरकार आंदोलन को बेवजह लंबा न खींचे।
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भाकियू प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस, किसान नेता कर्म सिंह मथाना व मलकीत सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को वार्ता का मौखिक न्योता तो दे रही है पर लिखित प्रस्ताव नहीं भेज रही। इससे सरकार की नीयत साफ नहीं लग रही। उन्होंने कहा कि सरकार बयानबाजी के बजाय वार्ता की मेज पर आए। किसान तैयार हैं और सरकार भी खुले मन से वार्ता करे।

चक्का जाम के दौरान बरता संयम, शांति से निपटा हर धरना
संयुक्त किसान मोर्चा की रणनीति काम आई और चक्का जाम पूरे राज्य में शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। धरनों में शामिल युवाओं ने संयम बरता व शांति का परिचय दिया। किसान नेताओं ने युवाओं को पहले ही समझाया था कि आंदोलन पर हिंसा का दाग नहीं लगना चाहिए। आंदोलन को बदनाम करने वाले ताक में बैठे हुए हैं। किसी के उकसाने पर भी उग्र नहीं होना है।

हिंसा की आशंका पर पुलिस ने बरती पूरी सतर्कता
पुलिस ने धरनों व चक्का जाम के दौरान हिंसा की आशंका के मद्देनजर पूरी एहतियात बरती। 45 पुलिस बटालियन के साथ ही सीआरपीएफ भी तैनात की गई थी। जगह-जगह उच्च अधिकारी तैनात थे व जवानों को साफ हिदायत थी कि आंदोलनकारियों से बेवजह टकराव न मोल लें। सीएम मनोहर लाल, गृह मंत्री अनिल विज, गृह सचिव राजीव अरोड़ा व डीजीपी मनोज यादव पूरी स्थिति की खुद निगरानी कर रहे थे। अधिकारियों ने 12 से 3 बजे तक की पूरी रिपोर्ट सीएम व गृह सचिव को दी।

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